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Bahraich News: जंगल से सटे इलाकों में हाथियों का झुंड मचा रहा तबाही, ग्रामीणों में दहशत

Thu, 28 Nov 2024 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Thu, 28 Nov 2024 12:29 AM IST
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A herd of elephants is creating havoc in the areas adjacent to the forest, villagers are terrified
कतर्नियाघाट संरक्षित वनक्षेत्र में विचरण करते हाथी की फाइल फोटो। 
मनोज तिवारी
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मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन जंगली हाथी आबादी व खेतों में पंहुचकर भारी तबाही मचाते हैं। इसकी वजह से ग्रामीणों को भागकर जान बचाना पड़ता है। जंगली हाथी इतने आक्रामक होते हैं कि अगर इन्होंने किसी को देख लिया तो उसे दौड़ाकर कुचल देते हैं। वहीं वन विभाग के पास अभी तक हाथी के हमले रोकने के कोई ठोस उपाय नहीं है।
एक संस्था गज मित्रों को नियुक्त कर ग्रामीणों को हाथियों के हमले से बचाव के लिए जागरूक कर रही है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग सात वन रेंजों में बंटा हुआ है। तीन वन रेंजों में हाथियों के हमले सबसे अधिक होते हैं। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में 250 से 300 तक हाथी होने का अनुमान है। इसमें से कुछ हाथी नेपाल के रायल बर्दिया पार्क से आए हैं। यह हाथी 40 से 60 के झुंड में रहते हैं और इनमें से कुछ टस्कर हाथी होते हैं जो काफी खतरनाक और आक्रामक होते हैं।
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गन्ने की खेती कर रही हाथियों को आकर्षित
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के किनारे ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मात्रा में गन्ने की खेती होती है। हाथियों को गन्ना और गुड़ बहुत पसंद होता है। इससे हाथी जंगल से बाहर निकलकर आबादी की ओर रुख कर देते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पंहुचकर गन्ने की फसल के साथ साथ अन्य फसलों को तबाह कर देते हैं। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग को हाथी रिजर्व घोषित होने के बाद हाथियों के हमले चार ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है। वहीं तीन हमलों में ग्रामीणों ने भाग कर जान बचाई है। हाथी दर्जन भर से ज्यादा घर गिरा चुके हैं।
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हाथियों के हमले से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले तरीके
ग्रामीण जंगली हाथियों से बचाव के लिए कंडे को जलाकर उसमें मिर्चा सुलगाते हैं। हाथियों के झुंड के हमले से बचने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर छतों पर चढ़कर थाली, गोला व पीपा बजाकरगांव से बाहर करने का प्रयास करते हैं। नेपाली हाथियों का झुंड कतर्नियाघाट जाने वाले मार्ग पर डेरा जमा लेते हैं। इससे मार्ग पर आवागमन बंद हो जाता है।

हाथियों के हमले
-4 जनवरी को जमुनिया गांव में फसल रौंदा तथा किसान गोविंद को दौड़ाया बाल-बाल बचा किसान
-12 फरवरी को बिछिया बाजार में हाथियों ने हमला कर कन्हैया का मकान गिराया
-19 जनवरी को निषाद नगर में तीन मिट्टी के घर व 1 टिनशेड का मकान किराया
-31 जनवरी को बनिया पुरवा गांव में 20 बीघा फसल रौंदी व 7 फूस के घर उजाडे
-9 फरवरी को जंगल के किनारे नेवलापुर के पास सरसों की 20 बीघा फसल तहस-नहस कर दी 24 फरवरी को वन रक्षक अजय सिंह पर हमला कर मरणासन्न दिया
हाथियों के हमले से मौत
-11 जनवरी 2023 को कतर्नियाघाट रेंज के ग्राम आंबा निवासी सुरेश कुमार खेत की रखवाली कर रहे थे हाथियों ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया।
-18 जनवरी 2023 को कतर्नियाघाट रेंज अन्तर्गत चित्रकार मैनेजर उर्फ राधे निवासी बिहारीपुरवा को चमन चौराहे के पास हाथियों रौंदकर मार डाला।
-26 फरवरी 2023 को कतर्नियाघाट रेंज के ग्राम भरथापुर निवासी छोटेलाल को पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया।
-11 अक्टूबर 2024 को कतर्नियाघाट वन रेंज के ग्राम भवानीपुर निवासी मुबारक को सूंढ से पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया। अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में मौत हो गई।
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