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अब महफूज आशियाने में घडि़याल बढ़ाएंगे कुनबा

Wed, 25 Dec 2013 05:44 AM IST
Bahraich
Bahraich Updated Wed, 25 Dec 2013 05:44 AM IST
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बहराइच/मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में घड़ियालों का कुनबा बढ़ाने की कवायद वन विभाग ने की है। इसके लिए गेरुआ नदी के तट पर घड़ियाल प्रजनन केंद्र स्थापित कर उनका संरक्षण किया जाएगा। दो प्रजनन केंद्रों की स्थापना की कार्ययोजना तैयार कर विभाग ने इसका प्रस्ताव निदेशालय भेजा था, जिसे हरी झंडी मिल गई है। एक करोड़ रुपये की इस परियोजना का काम भी शुरू हो गया है।
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कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियाल के कुनबे में इजाफे के लिए मुफीद मानी जाती है। प्रतिवर्ष नदी के टापू पर मादा घड़ियाल 40-50 घोंसलों में अंडो को सहेजती है लेकिन कभी यह घाेंसले हाथियों के पैरों तले रौंदे जाते हैं तो कभी नदी सूखने पर मवेशियाें और ग्रामीणों के आवागमन में घड़ियालों के अंडों को नुकसान पहुंचता है। जो घोसले सुरक्षित रहते हैं, उनसे बच्चों के निकलने पर उन्हें सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है। उन नन्हें घड़ियालों की जान के अपने ही दुश्मन बनते हैं, जिसके चलते गेरुआ में घड़ियालों का कुनबा फल फूल नहीं पा रहा है। इससे वन विभाग चिंतित है।
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प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने इस मामले में वन निदेशालय को रिपोर्ट भेजकर गेरुआ के तट पर प्रजनन केंद्र स्थापना का प्रस्ताव भी सुझाया था। इस प्रस्ताव को शासन ने हरी झंडी दे दी है। डीएफओ ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज में नदी के तट पर 20-20 टैंक के दो प्रजनन केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें घड़ियालों केे अंडों को सहेजकर कुनबा बढ़ाया जाएगा। वन विभाग को उम्मीद है कि इस कदम से घड़ियालों की संख्या में इजाफा होगा।
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एक टैंक में रखे जाएंगे 10-15 अंडे
डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि एक टैंक में घड़ियाल के 10-15 अंडे रखे जाएंगे। टैंक में बालू में वही तापमान दिया जाएगा जो नदी के टापू पर मिलता है। डीएफओ ने बताया कि अंडों से बच्चोें के निकलने पर टैंक में पानी भरकर उन्हेें सहेजा जाएगा और बड़े होने पर नदी में छोड़ा जाएगा।
नन्हें घड़ियालों को नर घड़ियाल बनाता भोजन
वन क्षेत्राधिकारी वसी इकबाल नकवी ने बताया कि नन्हें घड़ियालों को नदी में रहने वाले नर घड़ियाल अपना भोजन बना लेते हैं, जिसके चलते घड़ियालों की संख्या गेरुआ नदी में नहीं बन पा रही है। प्रजनन केंद्र में घड़ियालों की उम्र बढ़ने के बाद उन्हें नदी में छोड़ा जाएगा।
जून से होगी केंद्र की शुरुआत
डीएफओ ने बताया कि जून में नदी में टापू पर सुरक्षित किए गए मादा घड़ियाल के घोेंसलों को तलाश कर उससे अंडे निकालकर प्रजनन केंद्र के टैंक में शिफ्ट किए जाएंगे। उसी समय से केंद्र का संचालन शुरू होगा। उन्होंने कहा कि देखभाल के लिए विशेषज्ञ भी तैनात किए जाएंगे।
प्रतिवर्ष औसतन दो हजार घड़ियाल निकलते
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि कतर्नियाघाट के टापू पर मादा घड़ियालों द्वारा घाेंसलों में सहेजे गए अंडाें से प्रतिवर्ष औसतन दो हजार घड़ियाल निकलते हैं। प्राकृतिक वास के चक्कर में नन्हें घड़ियालों की जिंदगी पानी में ही खत्म हो जाती है।

1990 तक स्थापित था प्रजनन केंद्र
गेरुआ नदी के तट पर प्रजनन केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में की गई थी। उसी केंद्र की सहायता से घड़ियालों के कुनबे को बढ़ाया गया था, जिसका नतीजा रहा कि इस समय गेरुआ नदी में 200 घड़ियाल हैं। डीएफओ ने बताया कि 1990 तक प्रजनन केंद्र का संचालन हुआ था, लेकिन फिर तकनीकी कारणों से केंद्र बंद हो गया था।
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