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इंडो-नेपाल की खुली सीमा से भारत में प्रवेश की राह आसान
Bahraich
Updated Thu, 06 Jun 2013 05:30 AM IST
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बहराइच। इंडो-नेपाल की सीमा खुली होने का खामियाजा समय-समय पर भारत को उठाना पड़ता है। बेरोकटोक आवागमन के चलते नेपाल के रास्ते आसानी से आतंकी भारतीय सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। नेपाल में ज्यादा जांच पड़ताल नहीं होती, जिस कारण भारत में घुसपैठ आसान है। जिस रास्ते पर एसएसबी ने हिजबुल मुजाहिद्दीन और जेकेएलएफ संगठन के तीन आतंकियों को दबोचा है, उसी रास्ते से पाकिस्तान का आईएसआई एजेंट मसरूर भी भारत पहुंचा था। पूर्व में भी कई बार आतंकी घुसपैठ कर चुके हैं।
बहराइच से नेपाल की सीमा 110 किलोमीटर तक लगती है। इस सीमा क्षेत्र के 60 फीसदी भू-भाग पर जंगल और नदियां 40 फीसदी भू-भाग मैदानी है। बुधवार को इंडो-नेपाल सीमा पर सामान्य नागरिकों की तरह रिक्शे पर सवार होकर आतंकी संगठन के तीनों सदस्य तब पकड़े गए जब वह 100 मीटर भारतीय क्षेत्र में आ चुके थे। अगर एसएसबी जांच पड़ताल न करती तो आसानी से तीनों सदस्य रुपईडीहा कस्बे में दाखिल होकर अपने ठिकाने की ओर चले जाते। याद दिलाते चलें वर्ष 2008 में कुछ इसी तर्ज पर पाकिस्तान का आईएसआई एजेंट मसरूर उर्फ रमेश चौधरी भी भारतीय सीमा क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इसके बाद उसने लखनऊ के हजरतगंज में एक ग्लास कार्नर की दुकान पर नौकरी कर ली थी। इसके बाद सेना की रेकी करने का प्रयास किया था। जब उसे पकड़े जाने का शक हुआ तो वह सीमा पार जाने की फिराक में पकड़ा गया था। मसरूर के अलावा डेढ़ दशक पूर्व कुछ आतंकी संगठनों के लोग चोरी छिपे भारत में प्रवेश कर गए थे। हालांकि, उन्हें बाद में मुंबई और दिल्ली में पकड़ा गया था।
सीमा पर स्थित खेत और मकान होते हैं शरणगाह
सीमावर्ती सूत्रों की मानें तो नेपाल से घुसपैठ करने वाले भारत विरोधी तत्व नोमेंस लैंड के पास स्थित खेत और मकानों में शरण लेते हैं। आबादी में यह घुसपैठिए फेरी व्यवसायी या अन्य रूप में वेष बदल कर पनाह लेते हैं। एसएसबी की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों को जागरूक करने के लिए गोष्ठियां भी हुईं। लोगों को चलचित्रों के माध्यम से सुरक्षा का पाठ पढ़ाया गया।
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सीमावर्ती थाने अलर्ट
एसपी विनय कुमार ने बताया कि तीनों आतंकियों के पकड़े जाने के चलते रुपईडीहा के साथ ही नेपाल सीमा से सटे सुजौली, मोतीपुर, मुर्तिहा और नवाबगंज थानों को अलर्ट कर दिया गया है।
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बहराइच से नेपाल की सीमा 110 किलोमीटर तक लगती है। इस सीमा क्षेत्र के 60 फीसदी भू-भाग पर जंगल और नदियां 40 फीसदी भू-भाग मैदानी है। बुधवार को इंडो-नेपाल सीमा पर सामान्य नागरिकों की तरह रिक्शे पर सवार होकर आतंकी संगठन के तीनों सदस्य तब पकड़े गए जब वह 100 मीटर भारतीय क्षेत्र में आ चुके थे। अगर एसएसबी जांच पड़ताल न करती तो आसानी से तीनों सदस्य रुपईडीहा कस्बे में दाखिल होकर अपने ठिकाने की ओर चले जाते। याद दिलाते चलें वर्ष 2008 में कुछ इसी तर्ज पर पाकिस्तान का आईएसआई एजेंट मसरूर उर्फ रमेश चौधरी भी भारतीय सीमा क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इसके बाद उसने लखनऊ के हजरतगंज में एक ग्लास कार्नर की दुकान पर नौकरी कर ली थी। इसके बाद सेना की रेकी करने का प्रयास किया था। जब उसे पकड़े जाने का शक हुआ तो वह सीमा पार जाने की फिराक में पकड़ा गया था। मसरूर के अलावा डेढ़ दशक पूर्व कुछ आतंकी संगठनों के लोग चोरी छिपे भारत में प्रवेश कर गए थे। हालांकि, उन्हें बाद में मुंबई और दिल्ली में पकड़ा गया था।
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सीमा पर स्थित खेत और मकान होते हैं शरणगाह
सीमावर्ती सूत्रों की मानें तो नेपाल से घुसपैठ करने वाले भारत विरोधी तत्व नोमेंस लैंड के पास स्थित खेत और मकानों में शरण लेते हैं। आबादी में यह घुसपैठिए फेरी व्यवसायी या अन्य रूप में वेष बदल कर पनाह लेते हैं। एसएसबी की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों को जागरूक करने के लिए गोष्ठियां भी हुईं। लोगों को चलचित्रों के माध्यम से सुरक्षा का पाठ पढ़ाया गया।
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सीमावर्ती थाने अलर्ट
एसपी विनय कुमार ने बताया कि तीनों आतंकियों के पकड़े जाने के चलते रुपईडीहा के साथ ही नेपाल सीमा से सटे सुजौली, मोतीपुर, मुर्तिहा और नवाबगंज थानों को अलर्ट कर दिया गया है।