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पीलिया ने ली महिला की जान
Bahraich
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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बहराइच। जिले में पीलिया तेजी से फैल रहा है। पिछले एक सप्ताह में पीलिया से पांच मरीजों ने दम तोड़ा है। बुधवार को जिला अस्पताल में भर्ती एक और महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह एक सप्ताह से कोमा में थी। निमोनिया व वायरल के 10 और मरीज भर्ती हुए। दो की हालत गंभीर है।
पयागपुर निवासी नईमुननिशां (25) पत्नी अब्दुल करीम को बीते दो माह से बुखार की शिकायत थी। परिजन शुरुआत में स्थानीय निजी डॉक्टरों से इलाज करवा रहे थे। हालत में सुधार न होने पर नईमुननिशां को 11 नवंबर को जिला अस्पताल लाया गया। परीक्षण में उसमें पीलिया की पुष्टि हुई। इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार न हुआ। वह बीते नौ दिनों से अस्पताल में हिपेटिक कोमा में थी। बुधवार की सुबह नईमुननिशां ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने मौत कारण पीलिया के साथ-साथ खून की कमी बताया है। निमोनिया व वायरल के 10 और मरीजों को जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती किया गया है। इनमें पंकज (2), प्रिया (4), उत्कर्ष (1), सुनील (10), बृजेश (2), अलाउद्दीन (1), सत्य प्रकाश (2), समर प्रताप (2), संतोष कुमार (4), अंकुर (3)शामिल हैं। सभी का इलाज किया जा रहा है।
गंभीर हालत में आए थे रोगी
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. केराम का कहना है कि अब तक जिन पांच रोगियों की मौत पीलिया से जिला अस्पताल में हुई है, इनमें दो बलरामपुर के हैं। सभी गंभीर हालत में जिला अस्पताल आए थे। दो ढाई महीने से बीमार चल रहे थे। उन्होंने कहा कि पीलिया जलजनित रोग है। इसका प्रकोप बरसात के महीनों में होता है। अधिकांश लोग बरसात के दौरान ही चपेट में आ जाते हैं। लापरवाही के चलते पीलिया उनकी जिंदगी पर भारी पड़ता है।
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झाड़-फूंक से रहें दूर
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा बताते हैं कि पीलिया रोग का सबसे बड़ा कारक दूषित पेयजल है। इसके लक्षण छह सप्ताह बीत जाने के बाद ही नजर आते हैं। मरीज को थकान महसूस होने लगती है, भूख नहीं लगती है। खून की कमी से शरीर का रंग पीला पड़ जाता है। उन्होंने ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेने व झाड़-फूंक से दूर रहने की सलाह दी है।
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पयागपुर निवासी नईमुननिशां (25) पत्नी अब्दुल करीम को बीते दो माह से बुखार की शिकायत थी। परिजन शुरुआत में स्थानीय निजी डॉक्टरों से इलाज करवा रहे थे। हालत में सुधार न होने पर नईमुननिशां को 11 नवंबर को जिला अस्पताल लाया गया। परीक्षण में उसमें पीलिया की पुष्टि हुई। इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार न हुआ। वह बीते नौ दिनों से अस्पताल में हिपेटिक कोमा में थी। बुधवार की सुबह नईमुननिशां ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने मौत कारण पीलिया के साथ-साथ खून की कमी बताया है। निमोनिया व वायरल के 10 और मरीजों को जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती किया गया है। इनमें पंकज (2), प्रिया (4), उत्कर्ष (1), सुनील (10), बृजेश (2), अलाउद्दीन (1), सत्य प्रकाश (2), समर प्रताप (2), संतोष कुमार (4), अंकुर (3)शामिल हैं। सभी का इलाज किया जा रहा है।
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गंभीर हालत में आए थे रोगी
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. केराम का कहना है कि अब तक जिन पांच रोगियों की मौत पीलिया से जिला अस्पताल में हुई है, इनमें दो बलरामपुर के हैं। सभी गंभीर हालत में जिला अस्पताल आए थे। दो ढाई महीने से बीमार चल रहे थे। उन्होंने कहा कि पीलिया जलजनित रोग है। इसका प्रकोप बरसात के महीनों में होता है। अधिकांश लोग बरसात के दौरान ही चपेट में आ जाते हैं। लापरवाही के चलते पीलिया उनकी जिंदगी पर भारी पड़ता है।
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झाड़-फूंक से रहें दूर
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा बताते हैं कि पीलिया रोग का सबसे बड़ा कारक दूषित पेयजल है। इसके लक्षण छह सप्ताह बीत जाने के बाद ही नजर आते हैं। मरीज को थकान महसूस होने लगती है, भूख नहीं लगती है। खून की कमी से शरीर का रंग पीला पड़ जाता है। उन्होंने ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेने व झाड़-फूंक से दूर रहने की सलाह दी है।