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कतर्निया में हाथी की सवारी और बोटिंग नहीं
Bahraich
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में पर्यटकों के भ्रमण को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही 15 नवंबर से पर्यटकों के स्वागत में वन विभाग जुट गया है। बुकिंग शुरू कर दी गई है। अब क्रिसमस और नव वर्ष के अवसर पर पर्यटक जंगल के भ्रमण का मजा ले सकेंगे। लेकिन पर्यटकों को हाथी की सवारी और बोटिंग का लुत्फ नहीं मिलेगा।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र प्रतिवर्ष शीतकाल में 15 नवंबर को औपचारिक रूप से खुल जाता था। इस बार भी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देश पर 15 नवंबर से पर्यटकों को हरी झंडी दे दी गई है। लेकिन इस बार संरक्षित वन क्षेत्र के सिर्फ 20फीसदी हिस्से में ही पर्यटक टहल सकेंगे। इनमें कतर्नियाघाट का गेरुआ का तट, चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज शामिल है। लेकिन पर्यटकों के लिए निराशाजनक खबर यह है कि भ्रमण के लिए वन विभाग की ओर से जयमाला और चंपाकली हथिनी प्रतिवर्ष मुस्तैद रहती थी। इस बार यह हथनिया काम्बिंग में व्यस्त हैं जिसके चलते हाथी पर सवारी का मजा पर्यटक नहीं उठा पाएंगे। इतना ही नहीं नेपाल से आने वाली गेरुआ नदी का जलस्तर भी काफी नीचे पहुंच गया है। जगह-जगह टापू दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में स्टीमर और नाव का संचालन मुश्किल हो गया है। इससे बोटिंग की आस लिए पर्यटकों को निराशा ही हाथ लगेगी। सिर्फ साल और सागौन के दरख्तों के बीच भ्रमण का लुत्फ ही पर्यटक उठा सकते हैं। इसके अलावा हिरन की धमाचौकड़ी भी देखने को मिल सकती है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र प्रतिवर्ष शीतकाल में 15 नवंबर को औपचारिक रूप से खुल जाता था। इस बार भी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देश पर 15 नवंबर से पर्यटकों को हरी झंडी दे दी गई है। लेकिन इस बार संरक्षित वन क्षेत्र के सिर्फ 20फीसदी हिस्से में ही पर्यटक टहल सकेंगे। इनमें कतर्नियाघाट का गेरुआ का तट, चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज शामिल है। लेकिन पर्यटकों के लिए निराशाजनक खबर यह है कि भ्रमण के लिए वन विभाग की ओर से जयमाला और चंपाकली हथिनी प्रतिवर्ष मुस्तैद रहती थी। इस बार यह हथनिया काम्बिंग में व्यस्त हैं जिसके चलते हाथी पर सवारी का मजा पर्यटक नहीं उठा पाएंगे। इतना ही नहीं नेपाल से आने वाली गेरुआ नदी का जलस्तर भी काफी नीचे पहुंच गया है। जगह-जगह टापू दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में स्टीमर और नाव का संचालन मुश्किल हो गया है। इससे बोटिंग की आस लिए पर्यटकों को निराशा ही हाथ लगेगी। सिर्फ साल और सागौन के दरख्तों के बीच भ्रमण का लुत्फ ही पर्यटक उठा सकते हैं। इसके अलावा हिरन की धमाचौकड़ी भी देखने को मिल सकती है।
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