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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   70,000 children suffering from malnutrition

गर्भ से ही कुपोषण की चपेट में नौनिहाल

Fri, 11 Sep 2015 09:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Fri, 11 Sep 2015 09:25 PM IST
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बहराइच। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत पांच वर्ष आयु के 5893 बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं। इसका खुलासा प्रथम चरण के वजन दिवस से हुआ हैै, जबकि जिले में 70 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित हैं।
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यह आंकड़े नहीं हकीकत हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग को आईना दिखा रहे हैं। कुपोषण से निपटने के लिए संचालित योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
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बच्चे मां के पेट से ही कुपोषित होकर जन्म ले रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंटने वाला पुष्टाहार पशु आहार बन चुका हैै तो वहीं स्वास्थ्य विभाग में प्रसूताओं के हक पर ठेकेदार अपनी जेब भर रहे हैं।
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मिड-डे-मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में कोताही बरती जा रही है। आलम है कि कुपोषण की जंग में कमजोर पौध की नर्सरी तैयार हो रही है, जो देश के भविष्य के लिए चिंता का सबब है।

बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए बाल विकास परियोजना के माध्यम से नौनिहालों को विटामिन युक्त पोषाहार दिया जा रहा है। वहीं, परिषदीय स्कूलों में पौष्टिक भोजन देने की मंशा से सरकार मिड-डे मील योजना संचालित कर रही है।

इस सत्र में जिले के 3488 परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील के लिए तीन करोड़ की व्यवस्था की गई है। वहीं, बाल विकास परियोजना व जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के लिए भी करोड़ों रुपये सरकार ने आवंटित किया है। बावजूद इसके बच्चों को कुपोषण से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।

 राज्य पोषण मिशन के तहत पूर्व में हुए सर्वे के अनुसार जिले में 3094 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 70 हजार 884 कुपोषित और 8553 बच्चे अतिकुपोषित हैं। यह आंकड़ा शासन को भेजा गया लेकिन शासन ने इन आंकड़ों को सिरे से नकार दिया और दो चरणों में वजन दिवस मनाने का आदेश दिया।

सात सितंबर को आयोजित वजन दिवस के दौरान शून्य से पांच वर्ष आयु के 5893 बच्चे अतिकुपोषित मिले  हैं। वहीं, दस सितंबर को हुए वजन दिवस के आंकड़े अभी तैयार किए जा रहे हैं। अनुमान है कि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या करीब 15 हजार के आसपास पहुंच जाएगी।

एमडीएम के नाम पर खिचड़ी का भोज
परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील मीन्यू के हिसाब से नहीं मिल रहा हैै। भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी कोताही बरती जा रही है। विद्यालयों में ज्यादातर समय खिचड़ी बच्चों को परोसी जा रही है। सिर्फ खिचड़ी से बच्चों के स्वास्थ्य में कितना सुधार होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

दूध से ज्यादा पानी
शासन ने परिषदीय विद्यालयों में प्रत्येक बुधवार को बच्चों को दूध वितरित करने का निर्देश दिया है। जिले के विद्यालयों में यह लागू हो गया है लेकिन दूध की गुणवत्ता बेहद खराब रहती है। दूध में आधे से ज्यादा पानी मिलाकर उनकी सेहत सुधारने का असफल प्रयास जारी है।

पुष्टाहार बना पशुओं का आहार
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को गरमा-गरम भोजन परोसे जाने का प्रावधान है लेकिन, अधिकतर केंद्रों पर चूल्हे, बर्तन का इंतजाम तक नहीं है। लइया चना बच्चों को दिया जा रहा है। धात्री महिलाओं को भी पुष्टाहार मिल नहीं रहा है। यह पुष्टाहार मवेशियों का आहार बन गया है।


बीमारी नहीं है कुपोषण, जल्द कर लेंगे दूर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केबी जैन ने बताया कि कुपोषण कोई बीमारी नहीं है। साफ-सफाई, खान-पान व पौष्टिक तत्वों की कमी से शरीर में खून की कमी हो जाती है। बच्चों को विटामिन एक की खुराक के साथ ऑयरन व फोलिक एसिड की दवाइयां दी जा रही हैं। इससे बच्चे बहुत कम समय में सेहतमंद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
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