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नदी में समाए 35 बीघा खेत, फसल बर्बाद
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मोतीपुर तहसील के भरथापुर गांव में कटान करती सरयू नदी।
- फोटो : BAHRAICH
बिछिया (बहराइच)। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर तटवर्ती गांवों में दिख रहा है। भरथापुर गांव में सरयू नदी ने कटान करते हुए किसानों की 35 बीघा खेती धारा में समाहित कर लिया है। किसानों के खेत में लगी धान, हल्दी व गन्ना की फसल पानी में समाहित हो गई है। गांव का अस्तित्व पूरी तरह से सिमटने की कगार पर पहुंच गया है। लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से मदद की कार्रवाई नहीं की गई है।
नेपाल के कोठियाघाट से बहने वाली नदी भारतीय क्षेत्र में गेरुआ और कौड़ियाला नदी में बंट जाती है। यहां से नदियों का पानी सरयू बैराज में चला जाता है। जिससे अधिक मात्रा में पानी एकत्रित होता है। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर भी मोतीपुर तहसील क्षेत्र में दिख रहा है। कौड़ियाला नदी के टापू पर बसे भरथापुर गांव का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।
गांव निवासी किसान मुन्नालाल, परमानंद, झगरू, मंशाराम, दिनेश शर्मा, राजकुमार समेत अन्य किसानों की 35 बीघा खेत कटान में समाहित हो गई है। किसानों ने बताया कि खेत में लगी धान व हल्दी की फसल भी कटान में बह गई है। किसानों ने कटान होने की सूचना क्षेत्रीय लेखपाल के साथ तहसील में दी है। लेकिन मोतीपुर तहसील प्रशासन द्वारा कटान से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं न ही पीड़ितों को अभी तक मुआवजा दिया गया है। ऐसे में किसानों में नाराजगी है। ग्रामीणों के मुताबिक कटान इसी तरह होती रही तो जल्द ही गांव का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
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तहसील से ले रहे रिपोर्ट
भरथापुर गांव में कटान होने की सूचना मिली है। इसकी रिपोर्ट मोतीपुर तहसील प्रशासन से ली जा रही है। इसके बाद ग्रामीणों को नुकसान का मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी। -जयचंद्र पांडेय, एडीएम
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नेपाल के कोठियाघाट से बहने वाली नदी भारतीय क्षेत्र में गेरुआ और कौड़ियाला नदी में बंट जाती है। यहां से नदियों का पानी सरयू बैराज में चला जाता है। जिससे अधिक मात्रा में पानी एकत्रित होता है। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर भी मोतीपुर तहसील क्षेत्र में दिख रहा है। कौड़ियाला नदी के टापू पर बसे भरथापुर गांव का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।
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गांव निवासी किसान मुन्नालाल, परमानंद, झगरू, मंशाराम, दिनेश शर्मा, राजकुमार समेत अन्य किसानों की 35 बीघा खेत कटान में समाहित हो गई है। किसानों ने बताया कि खेत में लगी धान व हल्दी की फसल भी कटान में बह गई है। किसानों ने कटान होने की सूचना क्षेत्रीय लेखपाल के साथ तहसील में दी है। लेकिन मोतीपुर तहसील प्रशासन द्वारा कटान से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं न ही पीड़ितों को अभी तक मुआवजा दिया गया है। ऐसे में किसानों में नाराजगी है। ग्रामीणों के मुताबिक कटान इसी तरह होती रही तो जल्द ही गांव का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
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तहसील से ले रहे रिपोर्ट
भरथापुर गांव में कटान होने की सूचना मिली है। इसकी रिपोर्ट मोतीपुर तहसील प्रशासन से ली जा रही है। इसके बाद ग्रामीणों को नुकसान का मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी। -जयचंद्र पांडेय, एडीएम