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अक्षय तृतीया पर जमकर चमका सराफा बाजार
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बहराइच। अक्षय तृतीया पर मंगलवार को सराफा बाजार खूब चमका। शहर, कस्बों और गांवों के हर वर्ग ने अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का प्रयास किया। सोने के दाम में गिरावट के चलते सराफा बाजार ने खूब चमक बिखेरी। अनुमान के मुताबिक जिले में लगभग 1.5 करोड़ के गहने व सिक्कों की बिक्री हुई है। अपनी हैसियत के अनुसार लोगों ने सोने के जेवर खरीदने में विशेष रुचि दिखायी। ग्राहकों की भीड़ से दिनभर सराफा बाजार गुलजार रहा।
अक्षय तृतीया के मौके पर परंपरा निर्वहन के लिए सराफा बाजार पूरे जिले में सजा रहा। सुबह से ही सोने के जेवरात और सिक्कों की खरीदारी के लिए लोग दुकानों पर पहुंचने लगे। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार सोने के दाम में बेहतर गिरावट रही। लेकिन मौसम की बेरुखी जरूर भारी पड़ी, भीषण गर्मी ने लोगों के पांव रोके। इसके बावजूद अक्षय तृतीया पर जेवरात की खरीदारी के लिए लोग दुकानों पर पहुंचे। मोलभाव कर परंपरा का निर्वहन किया।
शहर और कस्बों में हर वर्ग ने अक्षय तृतीया पर सोने की खरददारी की। भारी जेवरात के बजाए हलके जेवरात लोगों की पसंद रहे। सोने की नाक की कील, अंगूठी, टप्स, झुमके खूब बिके। हर कोई अक्षय तृतीया पर सोना खरीदकर लक्ष्मी को रिझाने को आतुर दिखा।
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अधिकांश महिलाओं ने पुराने जेवर के बदले नये जेवर खरीदना अधिक पसंद किया। ग्राहकों की भीड़ के चलते पूरे दिन सराफा बाजारों में चहल-पहल रही। लोग एक दुकान से दूसरी दुकान तक जेवरात व सिक्कों के मोलभाव के लिए चक्कर लगाते दिखे। इस दौरान महिलाओं में काफी उत्साह दिखा।
सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि भीषण गर्मी का असर दुकानदारी पर दिखा है। दोपहर में ग्रामीण अंचलों के खरीदार नजर नहीं आए। अधिकांश लोग मोलभाव कर दुकान से किनारा कसते रहे। शहर और कस्बों के लोगों ने सिर्फ परंपरा का निर्वहन किया। हल्के जेवरों की खरीदारी अधिक हुई। उन्होंने बताया कि बाजार में ग्रामीण अंचलों के खरीदारों के काफी कम पहुंचने से अधिकतम डेढ़ करोड़ रुपये का व्यवसाय होने का अनुमान है।
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अक्षय तृतीया के मौके पर परंपरा निर्वहन के लिए सराफा बाजार पूरे जिले में सजा रहा। सुबह से ही सोने के जेवरात और सिक्कों की खरीदारी के लिए लोग दुकानों पर पहुंचने लगे। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार सोने के दाम में बेहतर गिरावट रही। लेकिन मौसम की बेरुखी जरूर भारी पड़ी, भीषण गर्मी ने लोगों के पांव रोके। इसके बावजूद अक्षय तृतीया पर जेवरात की खरीदारी के लिए लोग दुकानों पर पहुंचे। मोलभाव कर परंपरा का निर्वहन किया।
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शहर और कस्बों में हर वर्ग ने अक्षय तृतीया पर सोने की खरददारी की। भारी जेवरात के बजाए हलके जेवरात लोगों की पसंद रहे। सोने की नाक की कील, अंगूठी, टप्स, झुमके खूब बिके। हर कोई अक्षय तृतीया पर सोना खरीदकर लक्ष्मी को रिझाने को आतुर दिखा।
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अधिकांश महिलाओं ने पुराने जेवर के बदले नये जेवर खरीदना अधिक पसंद किया। ग्राहकों की भीड़ के चलते पूरे दिन सराफा बाजारों में चहल-पहल रही। लोग एक दुकान से दूसरी दुकान तक जेवरात व सिक्कों के मोलभाव के लिए चक्कर लगाते दिखे। इस दौरान महिलाओं में काफी उत्साह दिखा।
सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि भीषण गर्मी का असर दुकानदारी पर दिखा है। दोपहर में ग्रामीण अंचलों के खरीदार नजर नहीं आए। अधिकांश लोग मोलभाव कर दुकान से किनारा कसते रहे। शहर और कस्बों के लोगों ने सिर्फ परंपरा का निर्वहन किया। हल्के जेवरों की खरीदारी अधिक हुई। उन्होंने बताया कि बाजार में ग्रामीण अंचलों के खरीदारों के काफी कम पहुंचने से अधिकतम डेढ़ करोड़ रुपये का व्यवसाय होने का अनुमान है।