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29 अप्रैल पांच साल में सबसे गर्म
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2016 10:03 PM IST
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बहराइच में शुक्रवार दोपहर भीषण गर्मी में छात्राएं स्कूल से निकलीं तो तेज धूप के कारण बेहाल दिखीं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बहराइच। अप्रैैल जाते-जाते तराई का पारा 43 डिग्री पार कर गया। 29 अप्रैल को 43.2 डिग्री दर्ज पारा पिछले पांच साल में अप्रैल माह का सबसे गर्म दिन रहा।
हालांकि, ये वो आंकड़ा जो मौसम विभाग के पास है नहीं तो वास्तविकता में पिछले कई साल में अप्रैल इतना गर्म नहीं रहा। मौसम वैज्ञानिक तापमान में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी की बात कह रहे हैं।
बैसाख की दुपहरी लोगों को बेहाल किए है। सुबह 8 बजे से ही चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है। गर्म पछुआ झुलसन का अहसास करा रही है। दफ्तर जाने वाले लोग खुद को गमछा, टोपी से ढंककर निकल रहे हैं।
वहीं, घरों में भी लोगों को पंखे, कूलर और एसी से ज्यादा राहत नहीं मिल पा रही क्योंकि लो-वोल्टेज की समस्या बरकरार है। पिछले तीन चार दिन से 43 डिग्री पारे पर स्थिर तापमान शुक्रवार दोपहर 43.2 पर पहुंच गया।
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पश्चिमोत्तर दिशा से गर्म हवाएं 8 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं, जिसके चलते लोग झुलसने को मजबूर रहे। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बाजार की रौनक भी गायब दिखी।
ये हाल अप्रैल का है तो मई और जून में क्या होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे आम लोग तो परेशान हैं ही, मौसम वैज्ञानिक भी चिंतित हैं।
पेड़ों की कटान न रुकी बदतर होंगे हालात
पेड़ों की अंधाधुंध कटान पर अंकुश नहीं लग रहा है। जिसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में सामने आ रहा है। यही तापमान में बढ़ोतरी और मौसम परिवर्तन का कारक बन रहा है। इस दिशा में सभी को एकजुट होकर कदम उठाने की जरूरत है। वरना अप्रैल के महीने में जो हालात हैं, आने वाले समय में यही स्थिति मार्च में देखने को मिल सकती है।
-डॉ. एमवी सिंह, प्रभारी वैज्ञानिक फसल अनुसंधान केंद्र
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हालांकि, ये वो आंकड़ा जो मौसम विभाग के पास है नहीं तो वास्तविकता में पिछले कई साल में अप्रैल इतना गर्म नहीं रहा। मौसम वैज्ञानिक तापमान में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी की बात कह रहे हैं।
बैसाख की दुपहरी लोगों को बेहाल किए है। सुबह 8 बजे से ही चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है। गर्म पछुआ झुलसन का अहसास करा रही है। दफ्तर जाने वाले लोग खुद को गमछा, टोपी से ढंककर निकल रहे हैं।
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वहीं, घरों में भी लोगों को पंखे, कूलर और एसी से ज्यादा राहत नहीं मिल पा रही क्योंकि लो-वोल्टेज की समस्या बरकरार है। पिछले तीन चार दिन से 43 डिग्री पारे पर स्थिर तापमान शुक्रवार दोपहर 43.2 पर पहुंच गया।
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पश्चिमोत्तर दिशा से गर्म हवाएं 8 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं, जिसके चलते लोग झुलसने को मजबूर रहे। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बाजार की रौनक भी गायब दिखी।
ये हाल अप्रैल का है तो मई और जून में क्या होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे आम लोग तो परेशान हैं ही, मौसम वैज्ञानिक भी चिंतित हैं।
पेड़ों की कटान न रुकी बदतर होंगे हालात
पेड़ों की अंधाधुंध कटान पर अंकुश नहीं लग रहा है। जिसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में सामने आ रहा है। यही तापमान में बढ़ोतरी और मौसम परिवर्तन का कारक बन रहा है। इस दिशा में सभी को एकजुट होकर कदम उठाने की जरूरत है। वरना अप्रैल के महीने में जो हालात हैं, आने वाले समय में यही स्थिति मार्च में देखने को मिल सकती है।
-डॉ. एमवी सिंह, प्रभारी वैज्ञानिक फसल अनुसंधान केंद्र