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लपोखी डुबान क्षेत्र में बनेंगे 25 तालाब
अमर उजाला ब्यूरो/श्रावस्ती
Updated Sun, 31 Jan 2016 11:03 PM IST
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इस तालाब में अब 25 छोटे-छोट तालाब बनाए जाएंगे। इनकी मेड़ों पर पौधे लगेंगे। यही नहीं पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच सके, इसलिए बेंच और जल की शुद्धता बरकरार रहे, इसके लिए बतख भी पाले जाएंगे। जिले के अंदर यह अपने आप में एक नया प्रयोग होगा।
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इसकी शुरुआत शनिवार से बीडीओ ने पूजन कर किया। पहले बनने वाले तालाब पर लगभग सात लाख का खर्च आएगा। ग्राम पंचायत तिलकपुर में लगभग 122 बीघे में लपोखी तालाब स्थित है। बरसात के समय मौत का सबब बनने व सूखे में फटी धरती के लिए जाना जाने वाले इस तालाब का लाभ कभी भी किसानों को नहीं मिला।
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लेकिन अब मनरेगा से इस पूरे क्षेत्र को एक मॉडल जल संरक्षण केंद्र के रूप में उभारने की कार्य योजना खंड विकास कार्यालय द्वारा बनाई गई है। इसकी शुरुआत शनिवार शाम से खंड विकास अधिकारी डॉ. सुजीत कुमार सिंह द्वारा पूजा पाठ करके की गई।
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लपोखी तालाब के बदलते स्वरूप के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यह एक प्राचीन व प्राकृतिक लो-लैंड है, जो तालाब के आकार में केवल दिखाई देता है। बरसात के दौरान यहां पानी जमा हो जाता है। इसके चलते यह डुबान क्षेत्र के रूप में हो जाता है।
वहीं जल संरक्षण के लिए कोई कारगर व्यवस्था न होने के कारण पानी धीरे-धीरे फैल कर सूख जाता है। इससे गर्मियों में जानवरों को न तो पीने के लिए पानी मिल पाता है, न ही किसानों को सिंचाई के लिए। इसलिए इसे एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
खंड विकास अधिकारी डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने बताया कि लपोखी डुबान क्षेत्र में 75 फिट चौड़े व 35 फिट लंबे लगभग 25 तालाबों का निर्माण होगा। एक-दूसरे से सटे होने के कारण ये तालाब एक टैंक की भांति दिखाई देंगे। बरसात के दिनों में इन तालाबों में पानी भर जाएगा जो पूरे वर्ष बना रहेगा।
इन तालाबों के बीच इतने चौड़े मेड़ बनाए जाएंगे कि वहां बैठने व चार पहियों के आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था हो। तालाब के चारों ओर पौधे लगेंगे। कुछ चिह्नित स्थानों पर हट भी बनाए जाएंगे। इस प्रकार जल संरक्षण के लिए बनाया जाने वाला तालाब ईको टूरिज्म को भी बढ़ावा देगा।
इसके साथ ही ग्राम पंचायत को भी इससे लाभ प्राप्त हो इस लिए इन तालाबों को बतख व मछली पालन के लिए विकसित करने की कार्य योजना है ताकि यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति का पूर्ण आनंद ले सके। प्रत्येक तालाब पर लगभग 6.84 लाख रुपये खोदाई लागत आनी है।
पहले तालाब की खोदाई प्रारंभ की जा चुकी है। प्रयास यह रहेगा कि एक वर्ष में इन तालाबों को मूर्ति रूप दिया जा सके। ताकि यहां गरीबों को रोजगार मिले और एक माडल भी प्रस्तुत किया जा सके। इस दौरान उदय प्रताप मिश्रा ,प्रवीण कुमार उपाध्याय, ग्राम प्रधान गौतम पासवान, आदि लोग मौजूद रहे।