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नि:शक्त और वृद्धों में दिखा जज्बा
Updated Sun, 26 Nov 2017 11:30 PM IST
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बहराइच। विकलांग और वृद्धों में भी शहर की सरकार चुनने का जज्बा रविवार को दिखा। शारीरिक मजबूरी के बावजूद विकलांग और वृद्धों ने बूथों तक पहुंचकर मताधिकार का प्रयोग किया।
निकाय के लिए शहर की सरकार चुनने का जज्बा रविवार को तो सभी के मन में रहा। वोट डालने में वृद्ध और निशक्त भी पीछे नहीं रहे। किसी ने लाठियों के सहारे तो किसी ने परिजनों की सहायता से मतदान केंद्र पहुंचकर बैलेट पेपर पर मुहर लगाई। महिला महाविद्यालय के बूथ पर पोते के साथ वोट डालने आए 85 वर्षीय दरबारीलाल तिवारी पूछने पर बोले भैया परिवार के लोग पहले चले आये। हम भी वोट डालने आए हैं। कृषि प्रसार भवन स्थित अकबरपुरा के केंद्र में शाकरुन (60) भी लाठी के सहारे बूथ पर पहुंची। बोली हर बार वोट दिहा है, भगवान फिर मौका दिहिस है ठप्पा तो लगाइब। यहीं की सुल्ताना (65) ने कहा कि शहर के विकास के नाम पर वोट किया है। रिसिया में 95 वर्षीय जगपता, 78 वर्षीय बहादुर, बालक राम और जरवल में चौथे पायदान पर जिंदगी का सफर कर रहे लालबाबू, नानक प्रसाद ने भी परिजनों के साथ लाठी के सहारे बूथ पर पहुंच कर मताधिकार का प्रयोग किया। हर जगह विकलांग और वृद्ध मतदाताओं ने बेझिझक बूथ पर पहुंचकर वोट डाला।
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निकाय के लिए शहर की सरकार चुनने का जज्बा रविवार को तो सभी के मन में रहा। वोट डालने में वृद्ध और निशक्त भी पीछे नहीं रहे। किसी ने लाठियों के सहारे तो किसी ने परिजनों की सहायता से मतदान केंद्र पहुंचकर बैलेट पेपर पर मुहर लगाई। महिला महाविद्यालय के बूथ पर पोते के साथ वोट डालने आए 85 वर्षीय दरबारीलाल तिवारी पूछने पर बोले भैया परिवार के लोग पहले चले आये। हम भी वोट डालने आए हैं। कृषि प्रसार भवन स्थित अकबरपुरा के केंद्र में शाकरुन (60) भी लाठी के सहारे बूथ पर पहुंची। बोली हर बार वोट दिहा है, भगवान फिर मौका दिहिस है ठप्पा तो लगाइब। यहीं की सुल्ताना (65) ने कहा कि शहर के विकास के नाम पर वोट किया है। रिसिया में 95 वर्षीय जगपता, 78 वर्षीय बहादुर, बालक राम और जरवल में चौथे पायदान पर जिंदगी का सफर कर रहे लालबाबू, नानक प्रसाद ने भी परिजनों के साथ लाठी के सहारे बूथ पर पहुंच कर मताधिकार का प्रयोग किया। हर जगह विकलांग और वृद्ध मतदाताओं ने बेझिझक बूथ पर पहुंचकर वोट डाला।
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