{"_id":"59c4060a4f1c1bff6c8b45b4","slug":"171506018826-bahraich-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तराई में बूंदाबांदी से खुशनुमा हुआ मौसम, किसानों के चेहरे खिले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तराई में बूंदाबांदी से खुशनुमा हुआ मौसम, किसानों के चेहरे खिले
Updated Fri, 22 Sep 2017 12:50 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। तराई में अचानक मौसम फिर बदल गया है। गुरुवार भोर बूंदाबांदी के साथ हुई। दिन में बदली छायी रही। देर शाम को पुन: बादल गरजने-चमकने लगे। इससे मौसम काफी खुशनुमा हो गया। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली व किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी और वर्षा फसलों के लिए मुफीद मानी जा रही है।
तराई में मौसम का मिजाज रह-रह कर बदल रहा है। हालांकि बीते पखवारे भर से उमस और गर्मी से लोग बेहाल थे। वर्षा नहीं हो रही थी। गुरुवार सुबह बूंदाबांदी के साथ हुई। इसके बाद बादल छाये रहे। दोपहर एक बजे लगा कि सूरज चमकेगा, लेकिन फिर बादलों ने सूरज को ढह लिया। शाम को पुन: तेज पुरवा हवाओं के बीच बूंदाबांदी हुई। हालांकि देर रात बादल गरजते-चमकते दिखे। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते वर्षा की स्थिति बनी है। बूंदाबांदी के साथ रुक-रुक कर वर्षा के संकेत मिल रहे हैं। आगामी 24 घंटे तक इसी तरह के मौसम का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्षा धान, गन्ना और केला की खेती कर रहे किसानों के लिए काफी मुफीद है।
विज्ञापन
तराई में मौसम का मिजाज रह-रह कर बदल रहा है। हालांकि बीते पखवारे भर से उमस और गर्मी से लोग बेहाल थे। वर्षा नहीं हो रही थी। गुरुवार सुबह बूंदाबांदी के साथ हुई। इसके बाद बादल छाये रहे। दोपहर एक बजे लगा कि सूरज चमकेगा, लेकिन फिर बादलों ने सूरज को ढह लिया। शाम को पुन: तेज पुरवा हवाओं के बीच बूंदाबांदी हुई। हालांकि देर रात बादल गरजते-चमकते दिखे। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते वर्षा की स्थिति बनी है। बूंदाबांदी के साथ रुक-रुक कर वर्षा के संकेत मिल रहे हैं। आगामी 24 घंटे तक इसी तरह के मौसम का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्षा धान, गन्ना और केला की खेती कर रहे किसानों के लिए काफी मुफीद है।
विज्ञापन