{"_id":"5946b2db4f1c1b5b678b4580","slug":"171497805531-bahraich-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गमगीन माहौल में निकला शबीहे ताबूत का जुलूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गमगीन माहौल में निकला शबीहे ताबूत का जुलूस
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गमगीन माहौल में निकला शबीहे ताबूत का जुलूस
शिया समुदाय के लोग हुए शामिल
बहराइच। 21वीं रमजान के मौके पर शिया जामा मस्जिद सैय्यदवाड़ा से हजरत अली अलैहिस्सलाम का शबीहे का ताबूत शनिवार देर रात गमगीन माहौल में निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। सभी ने इमाम की शहादत पर नोहा मातम करते हुए जुलूस निकाला। यह जुलूस कर्बला में पहुंचकर समाप्त हुआ।
21वीं रमजान के मौके पर शिया जामा मस्जिद में शनिवार देर शाम मजलिस हुई, जिसे सैय्यद सगीर आबिद रिजवी अधिवक्ता ने खिताब किया। मजलिस को संबोधित करते हुए उन्होंने पढ़ा कि हजरत अली मोहम्मद साहब के दामाद व शिया के पहले इमाम थे। हज़रत अली की 18 रमजान को कूफे की मस्जिद में इब्ने मुल्जिम नाम के एक शख्स ने जहर से बुझी तलवार से घायल कर दिया था। 21वीं रमजान को वह अल्ला को प्यारे हुए। उन्हीं की याद में शिया तीन दिन तक शोक मनाते हैं। मजलिस के बाद ताबूत का जुलूस परंपरागत तरीके से निकाला गया। यह जुलूस सैयदवाड़ा, बशीरगंज होते हुए कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। इस मौके पर मालिक अख्तर जैदी, जीशान रिजवी, रईस आदि नौहाख्वानी कर रहे थे। जुलूस में सैयद कल्बे अब्बास, डॉक्टर लादले हुसैन, अताहुसैन जैदी, इजहार हुसैन जैदी, महमूद हसन, नोशाद मन्नू आदि तमाम लोग शामिल रहे
विज्ञापन
शिया समुदाय के लोग हुए शामिल
बहराइच। 21वीं रमजान के मौके पर शिया जामा मस्जिद सैय्यदवाड़ा से हजरत अली अलैहिस्सलाम का शबीहे का ताबूत शनिवार देर रात गमगीन माहौल में निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। सभी ने इमाम की शहादत पर नोहा मातम करते हुए जुलूस निकाला। यह जुलूस कर्बला में पहुंचकर समाप्त हुआ।
21वीं रमजान के मौके पर शिया जामा मस्जिद में शनिवार देर शाम मजलिस हुई, जिसे सैय्यद सगीर आबिद रिजवी अधिवक्ता ने खिताब किया। मजलिस को संबोधित करते हुए उन्होंने पढ़ा कि हजरत अली मोहम्मद साहब के दामाद व शिया के पहले इमाम थे। हज़रत अली की 18 रमजान को कूफे की मस्जिद में इब्ने मुल्जिम नाम के एक शख्स ने जहर से बुझी तलवार से घायल कर दिया था। 21वीं रमजान को वह अल्ला को प्यारे हुए। उन्हीं की याद में शिया तीन दिन तक शोक मनाते हैं। मजलिस के बाद ताबूत का जुलूस परंपरागत तरीके से निकाला गया। यह जुलूस सैयदवाड़ा, बशीरगंज होते हुए कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। इस मौके पर मालिक अख्तर जैदी, जीशान रिजवी, रईस आदि नौहाख्वानी कर रहे थे। जुलूस में सैयद कल्बे अब्बास, डॉक्टर लादले हुसैन, अताहुसैन जैदी, इजहार हुसैन जैदी, महमूद हसन, नोशाद मन्नू आदि तमाम लोग शामिल रहे
विज्ञापन