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घरौंदे रेत की दरिया में बनाने वाले, उम्र इसकी भी बताते जाते
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नानपारा (बहराइच)। हिंदी साहित्य सुरभि संस्थान नानपारा के तत्वावधान में रविवार की रात संस्थान की बैठक एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस मौके पर प्रतिभा चयन परीक्षा की तिथि का निर्धारण किया गया। अंत में कवियों ने काव्य पाठ कर वाहवाही लूटी।
नगर के सॉफ्ट पेटल विद्यालय परिसर में स्थित संस्था की उपाध्यक्ष वीरांगना कांत श्रीवास्तव के आवास पर हिंदी साहित्य सुरभि संस्थान के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें प्रतिभा चयन परीक्षा की तिथि चार अगस्त प्रस्तावित की गई। इसके बाद कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव ने की।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवि धीरेंद्र सिंह चंदेल ने वाणी वंदना से किया। कवि डॉ. अशोक गुप्ता ने पढ़ा, तन्हा मुझे छोड़ के जाने वाले, मेरी खता तो बताते जाते, घरौंदे रेत की दरिया में बनाने वाले, उम्र इसकी भी बताते जाते। वरिष्ठ अधिवक्ता व कवि रजनीकांत मिश्र ने पढ़ा, कुछ प्यार तुम्हारा है कुछ प्यार हमारा है, इतने में ही सारा संसार हमारा है। डॉ. दिनेश चंद्रा ने पढ़ा, कभी-कभी दिल हंसता है कभी-कभी दिल रोता है।
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प्रकाश वीर गुप्ता ने पढ़ा, कैसे रोशनी की राजधानी इसको कहेंगे, जब सूर्य वंश के यहां ललाट काले है। इसके अलावा डॉ. आनंद अग्रवाल, अवधेश चंद्र श्रीवास्तव आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर प्रेमनाथ मिश्रा, आदेश अग्रवाल, उमेश चंद्र शाह, मुकेश बेनीवाल, मुक्तेश्वर पोद्दार, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संतोष गुप्ता, आनंद रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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नगर के सॉफ्ट पेटल विद्यालय परिसर में स्थित संस्था की उपाध्यक्ष वीरांगना कांत श्रीवास्तव के आवास पर हिंदी साहित्य सुरभि संस्थान के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें प्रतिभा चयन परीक्षा की तिथि चार अगस्त प्रस्तावित की गई। इसके बाद कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव ने की।
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काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवि धीरेंद्र सिंह चंदेल ने वाणी वंदना से किया। कवि डॉ. अशोक गुप्ता ने पढ़ा, तन्हा मुझे छोड़ के जाने वाले, मेरी खता तो बताते जाते, घरौंदे रेत की दरिया में बनाने वाले, उम्र इसकी भी बताते जाते। वरिष्ठ अधिवक्ता व कवि रजनीकांत मिश्र ने पढ़ा, कुछ प्यार तुम्हारा है कुछ प्यार हमारा है, इतने में ही सारा संसार हमारा है। डॉ. दिनेश चंद्रा ने पढ़ा, कभी-कभी दिल हंसता है कभी-कभी दिल रोता है।
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प्रकाश वीर गुप्ता ने पढ़ा, कैसे रोशनी की राजधानी इसको कहेंगे, जब सूर्य वंश के यहां ललाट काले है। इसके अलावा डॉ. आनंद अग्रवाल, अवधेश चंद्र श्रीवास्तव आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर प्रेमनाथ मिश्रा, आदेश अग्रवाल, उमेश चंद्र शाह, मुकेश बेनीवाल, मुक्तेश्वर पोद्दार, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संतोष गुप्ता, आनंद रस्तोगी आदि मौजूद रहे।