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तेंदुए के हमले से बचने के लिए जंगल से सटा क्षेत्र जाल से होगा बंद
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बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट रेंज के विशुनपुर गांव में मंगलवार को बाघ के हमले में दादी व पोती की मौत के बाद बुधवार को वनाधिकारियों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों को सजग किया।
आबादी से सटे जंगल क्षेत्र को जाल से बंद करने की भी कवायद शुरू की। गांव के लोगों को जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी गई। पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाते हुए 10-10 हजार रुपये की अहेतुक सहायता दी गई।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत विशुनपुर गांव निवासी दादी और पोती पर मंगलवार को बाघ ने हमला कर उन्हें मार डाला।
इसके बाद बुधवार को प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह की अगुवाई में वन विभाग की टीम गांव पहुंची। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद डीएफओ ने गांव से लगे जंगल क्षेत्र को जाल लगाकर बंद करने के निर्देश दिए हैं।
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डीएफओ ने बताया कि प्लास्टिक नेट से बैरीकेडिंग का कार्य किया जाएगा, जिससे वन्यजीव आबादी की ओर न जा सकें। इसके बाद पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर डीएफओ ने 10-10 हजार रुपये की अहेतुक सहायता प्रदान की।
इसके बाद डीएफओ ने जूनियर विद्यालय परिसर में ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी। कहा कि वन क्षेत्र में बाघ और जंगली हाथियों का मूवमेंट बढ़ा है। ऐसे में जंगल से सटे खेतों में भी समूह में जाएं।
इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी पीयूष मोहन श्रीवास्तव, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन, उप प्रभागीय वनाधिकारी जसवंत, मंसूर अली, राधेश्याम, अनिल कुमार आदि मौजूद रहेे।
चार टीमें कर रहीं गश्त
डीएफओ जीपी सिंह ने कहा कि मंगलवार को बाघ के हमले में दो मौतों के बाद वनकर्मियों की चार टीमें गठित की गई हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में गश्त कर रही हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
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आबादी से सटे जंगल क्षेत्र को जाल से बंद करने की भी कवायद शुरू की। गांव के लोगों को जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी गई। पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाते हुए 10-10 हजार रुपये की अहेतुक सहायता दी गई।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत विशुनपुर गांव निवासी दादी और पोती पर मंगलवार को बाघ ने हमला कर उन्हें मार डाला।
इसके बाद बुधवार को प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह की अगुवाई में वन विभाग की टीम गांव पहुंची। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद डीएफओ ने गांव से लगे जंगल क्षेत्र को जाल लगाकर बंद करने के निर्देश दिए हैं।
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डीएफओ ने बताया कि प्लास्टिक नेट से बैरीकेडिंग का कार्य किया जाएगा, जिससे वन्यजीव आबादी की ओर न जा सकें। इसके बाद पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर डीएफओ ने 10-10 हजार रुपये की अहेतुक सहायता प्रदान की।
इसके बाद डीएफओ ने जूनियर विद्यालय परिसर में ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी। कहा कि वन क्षेत्र में बाघ और जंगली हाथियों का मूवमेंट बढ़ा है। ऐसे में जंगल से सटे खेतों में भी समूह में जाएं।
इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी पीयूष मोहन श्रीवास्तव, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन, उप प्रभागीय वनाधिकारी जसवंत, मंसूर अली, राधेश्याम, अनिल कुमार आदि मौजूद रहेे।
चार टीमें कर रहीं गश्त
डीएफओ जीपी सिंह ने कहा कि मंगलवार को बाघ के हमले में दो मौतों के बाद वनकर्मियों की चार टीमें गठित की गई हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में गश्त कर रही हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।