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डायरिया व बुखार से तीन मासूमों की सांसे थमी, 18 और भर्ती
Updated Mon, 16 Oct 2017 09:46 PM IST
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बहराइच। तराई में बदल रहे मौसम के बीच डायरिया और बुखार कहर बरपा रहे हैं। जिला अस्पताल में भोर से दोपहर तक पहुंचे तीन मासूमों ने इलाज शुरू होते ही दम तोड़ दिया। ये सभी डायरिया और बुखार की चपेट में थे। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर चले गए हैं। वहीं विभिन्न संक्रामक रोगों से पीड़ित और 18 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें तीन रोगियों की हालत नाजुक बताई जा रही है। उन्हें केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया है।
तराई में बदल रहे मौसम के बीच संक्रामक रोग पूरी तरह जानलेवा बन गए हैं। दिन में धूप और रात में सिहरन भरी ठंड का एहसास रोगों का संवाहक बन रहा है। हालात यह हैं कि नन्हे-मुन्नों के प्रति तनिक सी लापरवाही उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। विशेश्वरगंज के कोनी गांव निवासी बाबू (एक) पुत्र त्रिभुवन को बुखार व उल्टी-दस्त की शिकायत रविवार को हुई। परिवारीजनों ने निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया। इलाज के दौरान देर शाम तबियत अधिक बिगड़ गई। इस पर चिकित्सक ने जवाब दे दिया। परिवारीजन उसे लेकर सोमवार भोर में जिला अस्पताल आए। यहां पर जब मासूम को भर्ती करने की प्रक्रिया चल रही थी। तभी उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजन रोेते-बिलखते शव लेकर घर लौट गए। उधर बलरामपुर के गैसड़ी निवासी सुभाष (3.5) पुत्र प्रभु और श्रावस्ती के पिपरा निवासी लालू (4) पुत्र भगौती की भी जिला अस्पताल में पहुंचने पर मौत हो गई। उधर बुखार, डायरिया, निमोनिया और पीलिया से ग्रसित 18 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें ज्योति (3) निवासी रिसिया जमाल, निधि (एक) निवासी निजामपुर रानीपुर और अमन (8) निवासी रामपुर की हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों ने गंभीर रोगियों को केजीएमयू लखनऊ ले जाने की सलाह दी है।
बदल रहे मौसम में सावधानी बरतें अभिभावक
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में तनिक सी लापरवाही पर वायरल का खतरा तो रहता ही है। इसके अलावा नन्हें बच्चे डायरिया, निमोनिया और तेज बुखार की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में सजग रहकर अभिभावक उनकी जिंदगी की ढाल बन सकते है।
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बीते माह में हुई थी 57 मौतें
जिला अस्पताल में बीते माह बुखार, डायरिया और निमोनिया आदि से पीड़ित 57 बच्चों की मौत हुई थी। लेकिन इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। चिकित्सक मरीजों के गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने का कारण बता रहे हैं। वहीं आए दिन मरीज जिला अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप मढ़ रहे हैं। जिसके चलते हंगामे की स्थिति भी बनती है।
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तराई में बदल रहे मौसम के बीच संक्रामक रोग पूरी तरह जानलेवा बन गए हैं। दिन में धूप और रात में सिहरन भरी ठंड का एहसास रोगों का संवाहक बन रहा है। हालात यह हैं कि नन्हे-मुन्नों के प्रति तनिक सी लापरवाही उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। विशेश्वरगंज के कोनी गांव निवासी बाबू (एक) पुत्र त्रिभुवन को बुखार व उल्टी-दस्त की शिकायत रविवार को हुई। परिवारीजनों ने निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया। इलाज के दौरान देर शाम तबियत अधिक बिगड़ गई। इस पर चिकित्सक ने जवाब दे दिया। परिवारीजन उसे लेकर सोमवार भोर में जिला अस्पताल आए। यहां पर जब मासूम को भर्ती करने की प्रक्रिया चल रही थी। तभी उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजन रोेते-बिलखते शव लेकर घर लौट गए। उधर बलरामपुर के गैसड़ी निवासी सुभाष (3.5) पुत्र प्रभु और श्रावस्ती के पिपरा निवासी लालू (4) पुत्र भगौती की भी जिला अस्पताल में पहुंचने पर मौत हो गई। उधर बुखार, डायरिया, निमोनिया और पीलिया से ग्रसित 18 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें ज्योति (3) निवासी रिसिया जमाल, निधि (एक) निवासी निजामपुर रानीपुर और अमन (8) निवासी रामपुर की हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों ने गंभीर रोगियों को केजीएमयू लखनऊ ले जाने की सलाह दी है।
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बदल रहे मौसम में सावधानी बरतें अभिभावक
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में तनिक सी लापरवाही पर वायरल का खतरा तो रहता ही है। इसके अलावा नन्हें बच्चे डायरिया, निमोनिया और तेज बुखार की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में सजग रहकर अभिभावक उनकी जिंदगी की ढाल बन सकते है।
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बीते माह में हुई थी 57 मौतें
जिला अस्पताल में बीते माह बुखार, डायरिया और निमोनिया आदि से पीड़ित 57 बच्चों की मौत हुई थी। लेकिन इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। चिकित्सक मरीजों के गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने का कारण बता रहे हैं। वहीं आए दिन मरीज जिला अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप मढ़ रहे हैं। जिसके चलते हंगामे की स्थिति भी बनती है।