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जेब में 1200 रुपये बचे थे, न आते तो भूख से मर जाते

Sat, 28 Mar 2020 09:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2020 09:15 PM IST
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1200 rupees left in pocket, if not come, would have died of starvation
बहराइच में डीएम चौराहे पर आराम करते दिल्ली से आए युवक। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। रात के आठ बजे थे। हम लोग कंपनी में काम कर रहे थे। अचानक कंपनी के मालिक आए और बोले कि काम बंद करो। आज से काम नहीं होगा। आप लोग अपने घर जाओ। जाने के लिए किराया मांगा तो बोले कि जब पहले से कंपनी घाटे में चल रही है तो रुपये कहां से लेकर आएं। इतना कहने के बाद हम लोगों को कंपनी के बाहर कर दिया गया। दो दिन रुक कर वहां रहने के लिए व्यवस्था ढूंढते रहे। जब कोई व्यवस्था व काम नहीं मिला तो मजबूरन ट्रक के पीछे लटक कर आना पड़ा। अगर न आते तो हम लोगों को भूखे मर जाना पड़ता। क्योंकि हम लोगों की जेब में मात्र 1200 रुपये बचे थे। यह आपबीती दिल्ली से आए पांच युवकों ने बहराइच से गोंडा जाते समय सुनाई।
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कोरोना को रोकने केे लिए पीएम ने देश को लॉकडाउन किया तो गरीब तबके के लोग इसकी चपेट में आ गए। पीएम की अपील के बाद भी प्राइवेट कंपनी के मालिकों ने अपने यहां काम करने वाले लोगों को अपने घर बिना किसी संसाधन के भेज दिया। ऐसी कुछ आपबीती बताई, गोंडा जिले के बेदौरा बाजार निवासी सैयद अली, नूरूल हसन, शकील अहमद व शफीक अली ने। सैयद ने बताया कि वह दिल्ली के नोहरा में प्लेट बनाने के कंपनी में काम करता था।
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चार दिन पहले मालिक ने बिना रुपये व संसाधन दिए अपने घर जाने की बात कहकर कंपनी बंद कर दी। हम चारों लोगों ने दो दिन दिल्ली में काम व रहने की व्यवस्था ढूंढी तो सबने मना कर दिया। हम लोगों के पास ज्यादा पैसे भी नहंी थे। किसी के पास 1200 रुपये तो किसी के पास मात्र पांच सौ रुपये थे। आने-जाने के सारे रास्ते बंद थे। अब एक ही रास्ता था। कि किसी वाहन से लिफ्ट मांग कर आने का। दिल्ली में कोई रोका नहीं तो एक ट्रक के पीछे लटक कर हम लोग बरेली पहुंच गए। वहां से एक ट्रक बहराइच आ रहा था तो शनिवार को बहराइच आ गए। अब यहां कोई साधन नहीं है तो पैदल ही अपने घर जा रहे हैं। अगर वहां से आते न तो हम लोगों को भूखे मर जाना पड़ता।
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दुकानें बंद थीं, इसलिए भूखे रहना पड़ा
जब हम लोग दिल्ली से चले तो सड़कों पर सन्नाटा था और दुकानें सब बंद थीं। इसलिए हम लोगों को भूखे रहना पड़ा। शनिवार को बहराइच पहुंचे हैं। यहां से अब घर ज्यादा दूर नहीं बचा है। घर पहुंचकर पेट भर के खाना खाएंगे। दिल्ली से बहराइच पहुंचे चार युवकों ने कहा कि जब से काम छूटा है तब से सिर्फ दिमाग में एक ही बात याद आ रही है कि जल्दी से अपने परिवार के बीच में पहुंच जाऊं। परिवार को देखने के लिए आंखें तरस गई हैं।
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