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10 हजार की आबादी को 10 साल से पुल का इंतजार

Sun, 07 Nov 2021 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 11:06 PM IST
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10 thousand population has been waiting for the bridge for 10 years
महसी के सम्मनपुरवा में जर्जर हालत में लकड़ी से बना पुल। - फोटो : BAHRAICH
महसी (बहराइच)। महसी मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित बंजरिया गांव में 10 वर्षों से एक पुल की दरकार है। पुल न होने से एक दर्जन से अधिक गांवों की 10 हजार की आबादी प्रभावित है। गांव के लोग विगत पांच वर्षों से बांस-बल्लियों के सहारे वैकल्पिक पुल बनाकर अपना काम चला रहे हैं। हर बार बारिश के सीजन के बाद ग्रामीण आपसी सहयोग एवं चंदे से पुल का मरम्मत करते हैं। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस समस्या से अवगत हैं, लेकिन वह भी कोई पहल नहीं करते।
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नदी के दूसरी ओर सम्मनपुरवा, पढ़वहिया, नरकोटवा, गिरिधरपुर, गंधिला आदि गांव हैं। पुल नहीं होने से यहां के ग्रामवासी मुख्यालय की ओर आने के लिए 10 किमी. का अतिरिक्त सफर तय करते हैं। आठ वर्ष पहले सपा के तत्कालीन विधायक ने इस पुल को बनाने का प्रस्ताव भिजवाया था, लेकिन आज तक वह प्रस्ताव के रूप में ही है। क्षेत्र के वर्तमान विधायक भी सुध नहीं ले रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने जो वैकल्पिक पुल बना रखा है इससे सरयू नदी के इस पार के गांव बंजरिया, रमुवापुर गांव होते हुए ब्लाक व तहसील मुख्यालय की राह कुछ आसान कर दी। क्षेत्रीय ग्रामीण सैरुन, सुखराम, ज्वाला, धीरज, नकछेद, रामू, सुरेश आदि ने बताया कि नदी पर पक्के पुल के अभाव में न केवल आवागमन के संकट से उन्हें जूझना पड़ता है, बल्कि लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाएं भी सही ढंग से मिल पा रही हैं। बारिश के मौसम में नदी पर बने लकड़ी के पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो लोगों को 10 से 12 किलोमीटर घुमावदार मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है। एंबुलेंस, डायल 112, अग्निशमन वाहनों के पहुंचने में भी बाधाएं रहती है।
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मेरी जानकारी के मुताबिक वहां नहर पर कई पुल आवागमन के लिए बने हुए हैं। अगर कोई वैकल्पिक पुल बना है तो वह संभवत: निजी प्रयोग के लिए होगा। फिर भी इस समस्या को लेकर आज तक मेरे पास कोई मांग नहीं आई। अगर स्थानीय ग्रामीणों की कोई मांग आती है तो विचार किया जाएगा। - सुरेश्वर सिंह, विधायक महसी।
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