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अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौतियों का साल

Mon, 03 Feb 2020 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2020 12:15 AM IST
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Years of handling the economy
बागपत। बजट जारी हो चुका है। तमाम उम्मीद और चुनौतियां हैं। सबसे ज्यादा सवाल देश की अर्थ व्यवस्था को लेकर हैं। अर्थ शास्त्री कहते हैं कि साल 2019-20 में जीडीपी विकास दर के पांच फीसदी रहने के अनुमान की अगर पुष्टि हुई तो इसे अच्छे संकेत नहीं कह सकते। ऐसे में निवेश में कमी और रोजगार के संकट हालात को और अधिक मुश्किल करते हैं। चालू साल में अर्थ व्यवस्था को संभालना ही सबसे बड़ी चुनौती होगा।
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गिरती अर्थव्यवस्था को देनी होगी ताकत
दिगंबर जैन कॉलेज बड़ौत के अर्थशास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ कीर्ति शर्मा का कहना है कि तेजी से गिरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए समग्र मांग में वृद्धि के लिए उपभोग में वृद्धि, निवेश में वृद्धि, सरकारी व्यय में वृद्धि तथा निर्यात में संवर्धन हेतु पर्याप्त प्रयास नहीं किया गया है। आयकर के स्लैब एवं कर की दर में परिवर्तन किया है, लेकिन इससे बहुत ज्यादा असर आम आदमी के जीवन पर पड़ने वाला नहीं है।
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बढ़ रहा है राजकोषीय घाटा
जेवी कॉलेज बड़ौत के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर उरवेंद्र कुमार का कहना है कि राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। राजस्व के लक्ष्य प्राप्त नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में इस बार भी घाटा बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अर्थ व्यवस्था में उछाल कैसे आएगा, एकाएक सरकार ऐसा क्या कर देगी कि जीडीपी संभल जाए। बजट में इस तरह का कोई संदेश नहीं दिख रहा है। इस बजट में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्योगों के लिए, जिसमें रोजगार की संभावनाएं बहुत अधिक हैं, कोई विशेष प्रयत्न नहीं दिखता ।
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भरोसा जगाने मेें बजट नाकाम
दिगंबर जैन कॉलेज बड़ौत के अर्थशास्त्र विभाग में प्रोफेसर डॉ गोविंद बाबू कहते हैं कि कृषि क्षेत्र में प्रसंस्करण उद्योग के लिए सरकार ने कोई बेहतर कदम नहीं उठाया है। किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी के साथ रोजगार की संभावनाएं बहुत अधिक होती हैं। गांव से ही अर्थ व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन सरकार ऐसा कुछ नहीं कर सकी। सरकार और अधिक कर्ज लेगी, जिससे नुकसान और अधिक बढ़ेगा। मध्यम वर्ग को सबसे अधिक परेशानी होगी है। लोग बैंकों पर कैसे भरोसा करेंगे।

आयकर विशेषज्ञ डॉ. आरए गर्ग का कहना है कि बजट किसी भी वर्ग को खुश करने वाला नहीं है। कृषि, शिक्षा व ग्रामीण विकास के लिए बजट में काफी आकर्षक योजनाएं बनाई गई है, लेकिन उन सभी पर धनराशि का वितरण कम किया गया है। शिक्षा में विदेशी निवेश के रास्ते खुलने से भारत उच्च शिक्षा का हब बन सकता है, रोजगार पर ध्यान नहीं दिया गया। केवल एक क्षेत्र ऐसा है जो किसानों की मदद करेगा। वो है सोलर पंप लगाने से किसानों को लाभ होगा।
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