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धरने पर शहीद किसानों की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ किया
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बागपत/बिनौली। मवीकलां गांव में सरकार की बुद्धि-शुद्धि व कृषि कानून के विरोध में चल रहे धरने पर शहीद किसानों की आत्मा की शांति के लिए शुक्रवार को रालोद कार्यकर्ताओं ने यज्ञ किया। उधर, बागपत में पार्टी कार्यालय पर भी किसानों की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ किया गया। इसके उपरांत सरकार से किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए कृषि कानून वापस लेने की मांग की।
मवीकलां गांव में रालोद के जिला महासचिव धीरज उज्ज्वल ने कहा कि सरकार किसानों पर जबरन कृषि कानून थोपना चाहती है। कृषि कानून के विरोध में किसान नौ माह से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार सुनने के लिए तैयार नहीं है। विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस मौके पर रालोद जिला महासचिव राजू तोमर सिरसली, स्वराज पाल, डॉ. सुभाष उज्ज्वल, कृष्णपाल, ब्रह्मपाल, छंगाराम, वेदपाल, नीतू, विकास, अमित, उपेंद्र मौजूद रहे।
उधर, पार्टी कार्यालय पर ओमवीर ढाका ने कहा कि देश का किसान कृषि कानून के विरोध में धरना दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादूर शास्त्री व स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने किसानों को सबसे ऊपर रखा था। उन्होंने किसानों के हितों के कार्य किए। प्रधानमंत्री से 15 अगस्त को कृषि कानूनों को वापस करने की घोषणा करने की मांग की। इस मौके पर कृष्णपाल, अमर सिंह, कंवरपाल हुड्डा, सीताराम, सिकंदर, विकास सांगवान, चौधरी राजपाल, देवेंद्र, विक्रम पांचाल, प्रदीप नैन मौजूद रहे।
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मवीकलां गांव में रालोद के जिला महासचिव धीरज उज्ज्वल ने कहा कि सरकार किसानों पर जबरन कृषि कानून थोपना चाहती है। कृषि कानून के विरोध में किसान नौ माह से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार सुनने के लिए तैयार नहीं है। विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस मौके पर रालोद जिला महासचिव राजू तोमर सिरसली, स्वराज पाल, डॉ. सुभाष उज्ज्वल, कृष्णपाल, ब्रह्मपाल, छंगाराम, वेदपाल, नीतू, विकास, अमित, उपेंद्र मौजूद रहे।
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उधर, पार्टी कार्यालय पर ओमवीर ढाका ने कहा कि देश का किसान कृषि कानून के विरोध में धरना दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादूर शास्त्री व स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने किसानों को सबसे ऊपर रखा था। उन्होंने किसानों के हितों के कार्य किए। प्रधानमंत्री से 15 अगस्त को कृषि कानूनों को वापस करने की घोषणा करने की मांग की। इस मौके पर कृष्णपाल, अमर सिंह, कंवरपाल हुड्डा, सीताराम, सिकंदर, विकास सांगवान, चौधरी राजपाल, देवेंद्र, विक्रम पांचाल, प्रदीप नैन मौजूद रहे।
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