संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को मंदिर और घरों में माता के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने माता का पूजन करके सुख-समृद्धि की कामना की। मां कूष्मांडा की पूजा करने से .रोग-शोक दूर हो जाते हैं। आयु-यश में वृद्धि होती है। ज्योतिषाचार्य राजकुमार शास्त्री ने बताया किया माता कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं। जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इन सभी चीजों के अतिरिक्त हाथ में अमृत कलश भी है। इनका वाहन सिंह है और इनकी उपसना से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है। मां कूष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोग लगाकर ब्राह्मणों को इसका प्रसाद देना चाहिए। इससे माता की कृपा से भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है। विधि-विधान से माता की पूजा करने से बुद्धि और कौशल का विकास होता है। देवी को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी अर्पित करना चाहिए। बुधवार को माता के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता का पूजन किया जाएगा। स्कंदमाता का पूजन करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।