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Baghpat News: ट्रामा सेंटर सात साल से बनकर तैयार, अभी तक शुरू नहीं हुआ, लोगों की जा रही जान
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बागपत। जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर सात साल पहले बनने के बाद भी चालू नहीं हो सका। आईसीयू वार्ड पर भी ताले लटके हुए हैं, इसलिए यहां गंभीर घायलों का उपचार नहीं हो रहा है और उनको केवल रेफर किया जा रहा है। इससे उनकी जान जा रही है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद ट्रामा सेंटर जल्द शुरू करने की मांग उठने लगी।
जिला अस्पताल में गंभीर घायलों को रेफर करने की जगह उपचार देने के लिए वर्ष 2017 में ट्रामा सेंटर का निर्माण किया गया था और यह वर्ष 2019 में बनकर तैयार हो गया था। सात साल पहले भवन बनकर तैयार है, लेकिन आज तक भी स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है, क्योंकि यहां किसी भी तरह की गंभीर घायलों के लिए कोई सुविधा तक नहीं है और उन्हें सिर्फ यहां से रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आते हैं। अब यह भवन भी जर्जर होने लगा है। वहीं ट्रामा सेंटर की आधी बिल्डिंग को सीटी स्कैन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और आधा भवन में ताला लटका हुआ है। यह भवन अब जर्जर होने लगा है।
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आईसीयू वार्ड में भी लगा ताला
जिला अस्पताल में बने आईसीयू वार्ड में मरीजों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं है और वहां ताला लगा हुआ है। वार्ड में वेंटिलेटर व आईसीयू तक लगा रखे हैं और अब यह भी खराब होने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वार्ड शुरू करने के लिए कम से कम चिकित्सक सहित पांच का स्टाफ की 24 घंटे जरूरत पड़ती है। फिलहाल अस्पताल में स्टाफ नर्स के 70 पद हैं और इनमें से सिर्फ 14 ही नियमित हैं, जिनकी ड्यूटी महिला अस्पताल में लगाई गई है। वार्ड शुरू करने के लिए कई बार शासन को स्टाफ नर्स की नियुक्ति के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
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वर्जन
- स्टाफ की कमी के कारण ट्रामा सेंटर व आईसीयू वार्ड को चालू नहीं किया जा रहा है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है और स्टाफ मिलने के बाद चालू कर दिए जाएंगे।
-डॉ. अनुराग सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में गंभीर घायलों को रेफर करने की जगह उपचार देने के लिए वर्ष 2017 में ट्रामा सेंटर का निर्माण किया गया था और यह वर्ष 2019 में बनकर तैयार हो गया था। सात साल पहले भवन बनकर तैयार है, लेकिन आज तक भी स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है, क्योंकि यहां किसी भी तरह की गंभीर घायलों के लिए कोई सुविधा तक नहीं है और उन्हें सिर्फ यहां से रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आते हैं। अब यह भवन भी जर्जर होने लगा है। वहीं ट्रामा सेंटर की आधी बिल्डिंग को सीटी स्कैन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और आधा भवन में ताला लटका हुआ है। यह भवन अब जर्जर होने लगा है।
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आईसीयू वार्ड में भी लगा ताला
जिला अस्पताल में बने आईसीयू वार्ड में मरीजों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं है और वहां ताला लगा हुआ है। वार्ड में वेंटिलेटर व आईसीयू तक लगा रखे हैं और अब यह भी खराब होने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वार्ड शुरू करने के लिए कम से कम चिकित्सक सहित पांच का स्टाफ की 24 घंटे जरूरत पड़ती है। फिलहाल अस्पताल में स्टाफ नर्स के 70 पद हैं और इनमें से सिर्फ 14 ही नियमित हैं, जिनकी ड्यूटी महिला अस्पताल में लगाई गई है। वार्ड शुरू करने के लिए कई बार शासन को स्टाफ नर्स की नियुक्ति के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
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वर्जन
- स्टाफ की कमी के कारण ट्रामा सेंटर व आईसीयू वार्ड को चालू नहीं किया जा रहा है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है और स्टाफ मिलने के बाद चालू कर दिए जाएंगे।
-डॉ. अनुराग सीएमएस जिला अस्पताल