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बदरखा गांव के शिव मंदिर में सहज ही पूरी हो जाती है श्रद्धालुओं की मनोकामना
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बदरखा गांव का प्राचीन शिव मंदिर
- फोटो : BAGHPAT
मंदिर के आश्रम में ठहरे थे विदुर, उन्हीं के नाम पर गांव नाम रखा बदरखा
125 साल पहले जगतगुरु बद्रीनारायण शंकराचार्य ने रखी थी मंदिर की नींव
संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली (बागपत)। छपरौली से तीन किलोमीटर दक्षिण दिशा में बदरखा गांव के शिव मंदिर का इतिहास सालों पुराना है। लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने से मन्नतें पूरी हो जाती हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर के समीप आश्रम है। यहां से गुजरने के दौरान विदुर ठहरे थे। उन्हीं के नाम पर गांव का नाम बदरखा गया।
ग्रामीणों के अनुसार 125 साल पहले जगद्गुरु बद्रीनारायण शंकराचार्य ने मंदिर की नींव रखी थी। इसके बाद मुरलीधर जिंदल ने मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की मान्यता गांव और आसपास के क्षेत्र के अतिरिक्त दूरदराज में है। शिव भक्तों के लिए मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है।
गांव में महात्मा विदुर का स्थान है। मंदिर यमुना किनारे होने के कारण कृष्ण बौद्ध आश्रम महाराज मंदिर में ठहरते थे। महाराज यमुना में स्नान करने के बाद भगवान शिव को जल चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते थे। 1992 से मंदिर की देखरेख कर रहे गांव के विनोद शर्मा बताते हैं कि इस मंदिर में श्रद्धालुओं की मन्नतें पूर्ण होती हैं। मंदिर की क्षेत्र के साथ-साथ दूरदराज तक मान्यता है। मंदिर में गांव के अतिरिक्त, जिले भर से तथा हरियाणा के श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाने आते हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कराई जाती है। दूरदराज से आए श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर मनोवांछित फल पाकर लौटते हैं।
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125 साल पहले जगतगुरु बद्रीनारायण शंकराचार्य ने रखी थी मंदिर की नींव
संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली (बागपत)। छपरौली से तीन किलोमीटर दक्षिण दिशा में बदरखा गांव के शिव मंदिर का इतिहास सालों पुराना है। लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने से मन्नतें पूरी हो जाती हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर के समीप आश्रम है। यहां से गुजरने के दौरान विदुर ठहरे थे। उन्हीं के नाम पर गांव का नाम बदरखा गया।
ग्रामीणों के अनुसार 125 साल पहले जगद्गुरु बद्रीनारायण शंकराचार्य ने मंदिर की नींव रखी थी। इसके बाद मुरलीधर जिंदल ने मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की मान्यता गांव और आसपास के क्षेत्र के अतिरिक्त दूरदराज में है। शिव भक्तों के लिए मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है।
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गांव में महात्मा विदुर का स्थान है। मंदिर यमुना किनारे होने के कारण कृष्ण बौद्ध आश्रम महाराज मंदिर में ठहरते थे। महाराज यमुना में स्नान करने के बाद भगवान शिव को जल चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते थे। 1992 से मंदिर की देखरेख कर रहे गांव के विनोद शर्मा बताते हैं कि इस मंदिर में श्रद्धालुओं की मन्नतें पूर्ण होती हैं। मंदिर की क्षेत्र के साथ-साथ दूरदराज तक मान्यता है। मंदिर में गांव के अतिरिक्त, जिले भर से तथा हरियाणा के श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाने आते हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कराई जाती है। दूरदराज से आए श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर मनोवांछित फल पाकर लौटते हैं।
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