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मेहंदी रचाई और झूले पर बढ़ाई पींगे
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बारिश की बूंदें इस सावन में फैलाए चारों ओर हरियाली, ये हरयाली का त्यौहार ले जाए हर के आपकी सब परेशा
- फोटो : BAGHPAT
- तीज के त्योहार पर कोरोना का असर दिखा
- सार्वजनिक स्थानों पर झूला झूलने से बनाई दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना संक्रमण के बावजूद महिलाओं ने तीज के त्योहार को लेकर उत्साह दिखाया है। बाजार में खरीदारी की गई। सौदर्य प्रसाधन और झूलों की खरीददारी की गई। घरों में झूले भी पड़े और मेहंदी रचाई गई। कोरोना संक्रमण का ही असर रहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं झूला झूलने से बचती ही नजर आई।
हरियाली तीज के पर्व को लेकर महिलाओं ने बाजारों में सौदर्य प्रसाधन, चूड़ियों की दुकानों पर खरीदारी की। बाजार में सुबह से शाम तक शृंगार की दुकानों पर महिला व बच्चों की भीड़ लगी रही। घरों में झूले डाल लिए है। नगर की नेहा शर्मा का कहना है कि हरियाली तीज महिलाओं का त्योहार है। पर्व पर महिलाएं झूला झूलती और तीज के गीत गाती है। कीर्ति का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण इस बार पर्व फीका रह गया। रेखा का कहना है कि घर के आंगन में झूला डाल दिया है। वह घर पर ही त्योहार को मनाएगी। शहर की सत्यवती देवी का कहना है कि पर्व तो पहले मनाए जाते थे। कई दिन पहले तैयारियां शुरू हो जाती थी। घरों में गुजियां और पकवान बनाए जाते थे। सावन शुरू होते ही घरों में पेड़ों पर झूले डाल लिए जाते थे। रेखा का कहना है कि ज्योहार पर गली-मोहल्ले की महिलाएं व बच्चें इकट्ठा होकर झूला झूलते थे और तीज के गीत गाते थे।
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- सार्वजनिक स्थानों पर झूला झूलने से बनाई दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना संक्रमण के बावजूद महिलाओं ने तीज के त्योहार को लेकर उत्साह दिखाया है। बाजार में खरीदारी की गई। सौदर्य प्रसाधन और झूलों की खरीददारी की गई। घरों में झूले भी पड़े और मेहंदी रचाई गई। कोरोना संक्रमण का ही असर रहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं झूला झूलने से बचती ही नजर आई।
हरियाली तीज के पर्व को लेकर महिलाओं ने बाजारों में सौदर्य प्रसाधन, चूड़ियों की दुकानों पर खरीदारी की। बाजार में सुबह से शाम तक शृंगार की दुकानों पर महिला व बच्चों की भीड़ लगी रही। घरों में झूले डाल लिए है। नगर की नेहा शर्मा का कहना है कि हरियाली तीज महिलाओं का त्योहार है। पर्व पर महिलाएं झूला झूलती और तीज के गीत गाती है। कीर्ति का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण इस बार पर्व फीका रह गया। रेखा का कहना है कि घर के आंगन में झूला डाल दिया है। वह घर पर ही त्योहार को मनाएगी। शहर की सत्यवती देवी का कहना है कि पर्व तो पहले मनाए जाते थे। कई दिन पहले तैयारियां शुरू हो जाती थी। घरों में गुजियां और पकवान बनाए जाते थे। सावन शुरू होते ही घरों में पेड़ों पर झूले डाल लिए जाते थे। रेखा का कहना है कि ज्योहार पर गली-मोहल्ले की महिलाएं व बच्चें इकट्ठा होकर झूला झूलते थे और तीज के गीत गाते थे।
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