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टीबी रोगियों की खोज के लिए घर-घर होगी दस्तक
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10 से 31 मार्च तक चलाया जाएगा विशेष अभियान
क्षय रोग मुक्त भारत संकल्प को पूरा करने के लिए चलाया जाएगा अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। क्षय रोग मुक्त भारत संकल्प को पूरा करने के लिए टीबी रोगियों की खोज घर-घर की जाएगी। इसको लेकर दस्तक अभियान चलाया जाएगा। शासन के निर्देश पर जिले में भी इसकी योजना तैयार की गई है। इसे जिले में 10 से 31 मार्च तक चलाया जाएगा।
दस्तक अभियान में टीबी रोगियों की तलाश शामिल की गई है। इसकी जिम्मेदारी आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी गई है। अभियान में लगी टीम को बुखार व क्षय रोगियों के साथ जन्म-मृत्यु पंजीकरण से वंचित लोगों, कुपोषित बच्चों और दिमागी बुखार से दिव्यांग हुए लोगों की सूची तैयार करनी होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दस्तक अभियान में टीबी रोगियों की खोज को शामिल कराए जाने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा रोगियों का पता लगाना है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि दस्तक अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा घर-घर जाकर लोगों से खांसी आदि के संबंध में जानकारी करेंगी। ऐसे लोगों की सूची तैयार कर जिला मुख्यालय भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभियान में जितने भी क्षय रोगी खोजे जाएंगे। उनकी निशुल्क जांच के साथ इलाज तत्काल शुरू किया जाएगा। बताया कि साथ ही जब तक उनका इलाज चलेगा तब तक उनके खाते में हर माह निक्षय पोषण के तहत पांच सौ रुपये भी भेजे जाएंगे।
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यह है दस्तक अभियान का उद्देश्य
दस्तक अभियान का उद्देश्य क्षय रोग के लक्षण, जांच एवं उपचार के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करना है। वहीं, संदिग्ध क्षय रोगियों का चिह्निकरण करना है।
क्षय रोग से बचाव के लिए सावधानी
-खांसते व छींकते समय मुंह व नाक को कपड़े से ढकें।
- हर जगह न थूकें, जमीन पर थूकने के बजाए उस पर मिट्टी डालें।
-खांसी व टीबी के रोगियों को सामान्य मरीजों से अलग बैठाएं।
-अस्पताल में हवादार कमरे, टीबी के मरीजों के लिए अलग वार्ड होना चाहिए।
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क्षय रोग मुक्त भारत संकल्प को पूरा करने के लिए चलाया जाएगा अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। क्षय रोग मुक्त भारत संकल्प को पूरा करने के लिए टीबी रोगियों की खोज घर-घर की जाएगी। इसको लेकर दस्तक अभियान चलाया जाएगा। शासन के निर्देश पर जिले में भी इसकी योजना तैयार की गई है। इसे जिले में 10 से 31 मार्च तक चलाया जाएगा।
दस्तक अभियान में टीबी रोगियों की तलाश शामिल की गई है। इसकी जिम्मेदारी आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी गई है। अभियान में लगी टीम को बुखार व क्षय रोगियों के साथ जन्म-मृत्यु पंजीकरण से वंचित लोगों, कुपोषित बच्चों और दिमागी बुखार से दिव्यांग हुए लोगों की सूची तैयार करनी होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दस्तक अभियान में टीबी रोगियों की खोज को शामिल कराए जाने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा रोगियों का पता लगाना है।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि दस्तक अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा घर-घर जाकर लोगों से खांसी आदि के संबंध में जानकारी करेंगी। ऐसे लोगों की सूची तैयार कर जिला मुख्यालय भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभियान में जितने भी क्षय रोगी खोजे जाएंगे। उनकी निशुल्क जांच के साथ इलाज तत्काल शुरू किया जाएगा। बताया कि साथ ही जब तक उनका इलाज चलेगा तब तक उनके खाते में हर माह निक्षय पोषण के तहत पांच सौ रुपये भी भेजे जाएंगे।
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यह है दस्तक अभियान का उद्देश्य
दस्तक अभियान का उद्देश्य क्षय रोग के लक्षण, जांच एवं उपचार के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करना है। वहीं, संदिग्ध क्षय रोगियों का चिह्निकरण करना है।
क्षय रोग से बचाव के लिए सावधानी
-खांसते व छींकते समय मुंह व नाक को कपड़े से ढकें।
- हर जगह न थूकें, जमीन पर थूकने के बजाए उस पर मिट्टी डालें।
-खांसी व टीबी के रोगियों को सामान्य मरीजों से अलग बैठाएं।
-अस्पताल में हवादार कमरे, टीबी के मरीजों के लिए अलग वार्ड होना चाहिए।