{"_id":"e97d19a6dde398abd73c768469af4adc","slug":"where-farmers-take-211-million-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को कहां से मिलेंगे 211 करोड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को कहां से मिलेंगे 211 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 24 Sep 2015 12:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को अब गन्ने का बकाया भुगतान मिलने की उम्मीद फिलहाल खत्म हो चुकी है। किसानों का 211 करोड़ रुपये देने के लिए मलकपुर शुगर मिल के पास कुछ भी नहीं बचा है। मिल ने पूरी चीनी बेच दी है। जितना पैसा मिला उसका भुगतान कर दिया।
शीरा बचा उसको बेच कर मिल की मरम्मत एवं पेराई सत्र शुरू करने के लिए मशीनों को तैयार किया जा रहा है। ऐसे सवाल उठना लाजिमी है कि किसानों को 211 करोड़ रुपये कहां से मिलेंगे।
मलकपुर शुगर मिल ने किसानों को वर्ष 2014-15 पेराई सत्र के 292 करोड़ रुपये में से अब तक 81 करोड़ रुपये दिए हैं। पिछले पेराई सत्र के भुगतान में ही इस पेराई सत्र की चीनी खत्म हो गई। अब मिल के पास किसानों को बकाया भुगतान देने का कोई स्रोत नहीं रह गया है।
विज्ञापन
सिर्फ शीरा था, उसे बेचकर मिल की मरम्मत कराई जा रही है, जिससे 2015-16 के सत्र की पेराई शुरू की जा सके। किसानों का भुगतान तो अब लटक गया। अब तो किसानों को शादी, बीमारी और पढ़ाई के लिए भी पैसा नहीं मिल पाएगा। किसानों को भुगतान के लिए नए पेराई सत्र शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा।
नया पेराई सत्र शुरू होगा, चीनी बनेगी, बिक्री होगी और पैसा आएगा तो किसानों का भुगतान हो सकता है। 211 करोड़ रुपये का भुगतान शुरू करने में मिल को कम से कम छह माह का समय लग जाएगा।
मोदी भवन पर किसानों की आस
गन्ने के भुगतान के लिए किसानों की आस मोदी भवन बिकने पर लगी हुई है। हालांकि मोदी भवन है कि पांच साल से बिकने का नाम नहीं ले रहा है।
हर साल इसको बेचे जाने की अफवाह उड़ाकर किसानों को तसल्ली दे दी जाती है और तब तक पेराई सत्र शुरू कर दिया जाता है। और फिर किसान गन्ना डालने में लग जाते है। हर साल का यही रूटीन हो चुका है। पूरे एक पेराई सत्र का भुगतान पेंडिंग चल रहा है।
नहीं की जा सकी रिकवरी
प्रशासन ने किसानों को तसल्ली देने के लिए मलकपुर मिल की 272 करोड़ रुपये की आरसी जारी कर दी। 15 सितंबर को उसको दी गई समय सीमा भी पूरी हो गई। किसानों को 16 सितंबर की मीटिंग में आश्वासन दिया गया कि दो दिन में रिकवरी हो जाएगी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मिल प्रबंधन पर बनाया दबाव
जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार कहते हैं कि चीनी बिक गई है और शीरे से मिल की मरम्मत कराई जा रही है। हाल में ही पूरी चीनी बेचकर 50 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। अब 211 करोड़ रुपये शेष हैं। इसके भुगतान के लिए पूरा दबाव बनाया जा रहा है। राजस्व विभाग आरसी के सापेक्ष कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन
शीरा बचा उसको बेच कर मिल की मरम्मत एवं पेराई सत्र शुरू करने के लिए मशीनों को तैयार किया जा रहा है। ऐसे सवाल उठना लाजिमी है कि किसानों को 211 करोड़ रुपये कहां से मिलेंगे।
विज्ञापन
मलकपुर शुगर मिल ने किसानों को वर्ष 2014-15 पेराई सत्र के 292 करोड़ रुपये में से अब तक 81 करोड़ रुपये दिए हैं। पिछले पेराई सत्र के भुगतान में ही इस पेराई सत्र की चीनी खत्म हो गई। अब मिल के पास किसानों को बकाया भुगतान देने का कोई स्रोत नहीं रह गया है।
विज्ञापन
सिर्फ शीरा था, उसे बेचकर मिल की मरम्मत कराई जा रही है, जिससे 2015-16 के सत्र की पेराई शुरू की जा सके। किसानों का भुगतान तो अब लटक गया। अब तो किसानों को शादी, बीमारी और पढ़ाई के लिए भी पैसा नहीं मिल पाएगा। किसानों को भुगतान के लिए नए पेराई सत्र शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा।
नया पेराई सत्र शुरू होगा, चीनी बनेगी, बिक्री होगी और पैसा आएगा तो किसानों का भुगतान हो सकता है। 211 करोड़ रुपये का भुगतान शुरू करने में मिल को कम से कम छह माह का समय लग जाएगा।
मोदी भवन पर किसानों की आस
गन्ने के भुगतान के लिए किसानों की आस मोदी भवन बिकने पर लगी हुई है। हालांकि मोदी भवन है कि पांच साल से बिकने का नाम नहीं ले रहा है।
हर साल इसको बेचे जाने की अफवाह उड़ाकर किसानों को तसल्ली दे दी जाती है और तब तक पेराई सत्र शुरू कर दिया जाता है। और फिर किसान गन्ना डालने में लग जाते है। हर साल का यही रूटीन हो चुका है। पूरे एक पेराई सत्र का भुगतान पेंडिंग चल रहा है।
नहीं की जा सकी रिकवरी
प्रशासन ने किसानों को तसल्ली देने के लिए मलकपुर मिल की 272 करोड़ रुपये की आरसी जारी कर दी। 15 सितंबर को उसको दी गई समय सीमा भी पूरी हो गई। किसानों को 16 सितंबर की मीटिंग में आश्वासन दिया गया कि दो दिन में रिकवरी हो जाएगी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मिल प्रबंधन पर बनाया दबाव
जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार कहते हैं कि चीनी बिक गई है और शीरे से मिल की मरम्मत कराई जा रही है। हाल में ही पूरी चीनी बेचकर 50 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। अब 211 करोड़ रुपये शेष हैं। इसके भुगतान के लिए पूरा दबाव बनाया जा रहा है। राजस्व विभाग आरसी के सापेक्ष कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।