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Baghpat News: 47 साल में 50 करोड़ रुपये खर्च हुए, पानी आज तक नहीं मिला
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बागपत। चौगामा क्षेत्र के 40 गांवों में फसलों की सिंचाई के लिए चौधरी चरण सिंह नहर परियोजना (चौगामा नहर) पर 47 साल में 50 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, मगर पानी फिर भी नहीं मिल सका।
हालात यह है कि इस अधूरी नहर की सफाई पर हर साल 32 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल का 32 लाख रुपये बजट मिलने पर नहर की सफाई शुरू करा दी गई और पानी मिलने की उम्मीद अब भी नहीं है। चौगामा क्षेत्र में जलस्तर लगातार गिरने के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई का संकट पैदा होने लगा थाए इसलिए वर्ष 1978 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह ने नहर परियोजना की शुरूआत कराई थी। इससे मुजफ्फरनगर व बागपत जिले के गांवों को जोड़ा गया था। इस परियोजना पर कई बार में अभी तक 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, मगर यह अभी तक पूरी नहीं हो सकी। इससे पानी मिला नहीं और सरकार के खजाने पर हर साल 32 लाख रुपये का बोझ पड़ने लगा। यह 32 लाख रुपये हर साल इस नहर की सफाई पर किए जा रहे हैं। हर साल जब नहर की सफाई होती है तो लोगों को उम्मीद जगती है कि शायद इस बार नहर में पानी आएगा मगर वक्त के साथ उम्मीद भी टूट जाती है और किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए नलकूप पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सत्याग्रह तक किया, फिर भी नहीं मिला पानी
किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक चौधरी नरेंद्र राणा ने चौगामा नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसानों के साथ मिलकर वर्ष 2012 में मेरठ में सत्याग्रह किया। तब आश्वासन के बाद भी पानी नहीं छोड़ा। इसके बाद समय-समय पर आंदोलन किए गए और किसानों को हर बार निराशा मिली।
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चौगामा नहर से जुड़े गांव
निरपुड़ा, भड़ल, धनौरा, तमेलागढ़ी, पुसार, दोघट, टीकरी, बोपुरा, फौलादनगर, झुंडपुर, मिलाना, आजमपुर मुलसम, पलड़ी, कान्हड़, पलड़ा, शाहजहांपुर, इदरीशपुर, आदमपुर, मांगरौली, नंगला कनवाड़ा, चित्तमखेड़ी, गांगनौली, हिम्मतपुर सूजती, दाहा, गैड़बरा समेत अन्य गांवों से होकर यह नहर गुजर रही है।
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- चौगामा नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर कई महीने तक सत्याग्रह व आंदोलन किया था। मेरठ से लखनऊ तक पद यात्रा की, लेकिन फिर भी नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। किसान 47 साल से नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।
-चौधरी नरेंद्र राणा, दाहा
- सिंचाई विभाग हर साल चौगामा नहर की सफाई कराता है और इसके लिए 32 लाख रुपये खर्च कर दिए जाते हैं, मगर पानी नहीं छोड़ा जाता है। किसानों को हर बार पानी छोड़ने का आश्वासन दिया जाता है। इस समय फसल की सिंचाई के लिए किसानों को पानी की जरूरत है और नहर की सफाई शुरू होने के साथ ही उम्मीद जगी है।
-देवेंद्र राणा, दाहा
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वर्जन
- चौगामा नहर की सफाई कराई जा रही है और इसके लिए 32 लाख रुपये का बजट आया है। इस बार जुलाई माह तक नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा ताकि किसान फसलों की सिंचाई कर सकें।
-सुशील कुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग
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हालात यह है कि इस अधूरी नहर की सफाई पर हर साल 32 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल का 32 लाख रुपये बजट मिलने पर नहर की सफाई शुरू करा दी गई और पानी मिलने की उम्मीद अब भी नहीं है। चौगामा क्षेत्र में जलस्तर लगातार गिरने के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई का संकट पैदा होने लगा थाए इसलिए वर्ष 1978 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह ने नहर परियोजना की शुरूआत कराई थी। इससे मुजफ्फरनगर व बागपत जिले के गांवों को जोड़ा गया था। इस परियोजना पर कई बार में अभी तक 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, मगर यह अभी तक पूरी नहीं हो सकी। इससे पानी मिला नहीं और सरकार के खजाने पर हर साल 32 लाख रुपये का बोझ पड़ने लगा। यह 32 लाख रुपये हर साल इस नहर की सफाई पर किए जा रहे हैं। हर साल जब नहर की सफाई होती है तो लोगों को उम्मीद जगती है कि शायद इस बार नहर में पानी आएगा मगर वक्त के साथ उम्मीद भी टूट जाती है और किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए नलकूप पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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सत्याग्रह तक किया, फिर भी नहीं मिला पानी
किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक चौधरी नरेंद्र राणा ने चौगामा नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसानों के साथ मिलकर वर्ष 2012 में मेरठ में सत्याग्रह किया। तब आश्वासन के बाद भी पानी नहीं छोड़ा। इसके बाद समय-समय पर आंदोलन किए गए और किसानों को हर बार निराशा मिली।
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चौगामा नहर से जुड़े गांव
निरपुड़ा, भड़ल, धनौरा, तमेलागढ़ी, पुसार, दोघट, टीकरी, बोपुरा, फौलादनगर, झुंडपुर, मिलाना, आजमपुर मुलसम, पलड़ी, कान्हड़, पलड़ा, शाहजहांपुर, इदरीशपुर, आदमपुर, मांगरौली, नंगला कनवाड़ा, चित्तमखेड़ी, गांगनौली, हिम्मतपुर सूजती, दाहा, गैड़बरा समेत अन्य गांवों से होकर यह नहर गुजर रही है।
- चौगामा नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर कई महीने तक सत्याग्रह व आंदोलन किया था। मेरठ से लखनऊ तक पद यात्रा की, लेकिन फिर भी नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। किसान 47 साल से नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।
-चौधरी नरेंद्र राणा, दाहा
- सिंचाई विभाग हर साल चौगामा नहर की सफाई कराता है और इसके लिए 32 लाख रुपये खर्च कर दिए जाते हैं, मगर पानी नहीं छोड़ा जाता है। किसानों को हर बार पानी छोड़ने का आश्वासन दिया जाता है। इस समय फसल की सिंचाई के लिए किसानों को पानी की जरूरत है और नहर की सफाई शुरू होने के साथ ही उम्मीद जगी है।
-देवेंद्र राणा, दाहा
वर्जन
- चौगामा नहर की सफाई कराई जा रही है और इसके लिए 32 लाख रुपये का बजट आया है। इस बार जुलाई माह तक नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा ताकि किसान फसलों की सिंचाई कर सकें।
-सुशील कुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग