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जल भराव व गदंगी की मार झेल रहे बावली गांव के ग्रामीण
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बड़ौत। स्थानीय प्रशासन और ग्राम सचिव की उदासीनता के चलते पिछले एक दशक से बावली गांव के ग्रामीण जल भराव और गंदगी की मार झेल रहे हैं। आलम यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अभी तक प्रशासन एक भी तालाब से अतिक्रमण नहीं हटवा पाया है। इससे ग्रामीण परेशान हैं और उन्हें आगामी बरसाती मौसम का डर सता रहा है।
विकास खंड बड़ौत के अंतर्गत आने वाले बावली गांव की आबादी लगभग 16 हजार है और गांव में चार तालाब है। ग्रामीणों के अनुसार सभी तालाब 40 से 50 बीघा में फैले थे, जो अतिक्रमण के चलते अब सिमटकर मात्र 8 से 10 बीघा में ही रह गए हैं। अतिक्रमण के चलते तालाब पूरी तरह से गंदगी से अटे हैं। इससे गांव मेें संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
क्या कहते है ग्रामीण
पूरा गांव झेल रहा दंश
बड़ौत। बावली गांव के अनुज और समर पाल का कहना है कि तालाबों के आसपास रहने वाले लोगों ने ही उन पर अतिक्रमण कर रखा है, जिस कारण पूरे गांव को इसका दंश झेलना पड़ रहा है।
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नहीं हो रही सुनवाई
बड़ौत। दीपक और सुधीर का कहना है कि दर्जनों बार इस संबंध मेें तहसील सहित ग्राम सचिव रेशु को की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
ये बोले प्रधान व सचिव
कई बार प्रशासन से की जा चुकी है मांग
बड़ौत। ग्राम प्रधान के पति ओमवीर का कहना है कि तालाबों पर हुए अतिक्रमण को लेकर प्रशासन से कई बार मांग कर चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पूरे गांव के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
नहीं मिल रही फोर्स
बड़ौत। ग्राम सचिव रेशू का कहना था कि उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बिना पुलिस फोर्स के तालाबों से अतिक्रमण हटवाना संभव नहीं है।
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विकास खंड बड़ौत के अंतर्गत आने वाले बावली गांव की आबादी लगभग 16 हजार है और गांव में चार तालाब है। ग्रामीणों के अनुसार सभी तालाब 40 से 50 बीघा में फैले थे, जो अतिक्रमण के चलते अब सिमटकर मात्र 8 से 10 बीघा में ही रह गए हैं। अतिक्रमण के चलते तालाब पूरी तरह से गंदगी से अटे हैं। इससे गांव मेें संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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क्या कहते है ग्रामीण
पूरा गांव झेल रहा दंश
बड़ौत। बावली गांव के अनुज और समर पाल का कहना है कि तालाबों के आसपास रहने वाले लोगों ने ही उन पर अतिक्रमण कर रखा है, जिस कारण पूरे गांव को इसका दंश झेलना पड़ रहा है।
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नहीं हो रही सुनवाई
बड़ौत। दीपक और सुधीर का कहना है कि दर्जनों बार इस संबंध मेें तहसील सहित ग्राम सचिव रेशु को की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
ये बोले प्रधान व सचिव
कई बार प्रशासन से की जा चुकी है मांग
बड़ौत। ग्राम प्रधान के पति ओमवीर का कहना है कि तालाबों पर हुए अतिक्रमण को लेकर प्रशासन से कई बार मांग कर चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पूरे गांव के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
नहीं मिल रही फोर्स
बड़ौत। ग्राम सचिव रेशू का कहना था कि उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बिना पुलिस फोर्स के तालाबों से अतिक्रमण हटवाना संभव नहीं है।