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सांकरौद के किसानो ने बागपत गन्ना मिल प्रबंधन के खिलाफ हंगामा कर आर्थिक व मानसिक शोषण का लगाया आरोप
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खेकड़ा। क्षेत्र के गांव सांकरौद निवासी किसानों ने बागपत गन्ना मिल प्रबंधन पर गन्ना बांड बनाने के नाम पर किसानों का आर्थिक व मानसिक शोषण करने का आरोप लगा हंगामा प्रदर्शन किया।
शनिवार को गांव साकरौंद स्थित प्राचीन शिव मंदिर मे किसानों की बैठक हुई। बैठक में किसानों ने बागपत गन्ना मिल अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर कहा कि बांड बनाने के लिए किसानों से प्रतिवर्ष नए सिरे से फर्द, बैंक खाता नंबर, आधार नंबर मांगे जाते है, इसमें किसानों के बहुत रुपये खर्च होते है। मिल अधिकारियों को केवल उन किसानों से कागज लेने चाहिए। जिन्होंने जमीन क्रय या विक्रय की हो या बांड नामित किसान की मृत्यु हो गई है। अनावश्यक कवायद में किसानों को फरद निकलवाने में बागपत, खेकडा तहसील के चक्कर लगाने पड़ते है। साथ ही रुपये भी खर्च करने पड़ते है।
किसानों ने कहा कि सांकरौद मौजे के किसानों की जमीन, खादर, बांगर, कुतुबपुर वीरान, फखरपुर, गढी आदि में है। कई किसानों ने गांव सुभानपुर में भी जमीन खरीदी हुई है। सबकी अलग अलग फर्द निकलवानी पड़ती है। किसानों ने जिलाधिकारी और जिला गन्नाधिकारी से प्रतिवर्ष कागज लेने की व्यवस्था पर विराम लगाने की मांग की है। ताकि किसानो का आर्थिक नुकसान होने से बच सके। इस दौरान ओमबीर सिंह, चौधरी देवेंद्र धामा, कृष्णपाल सिंह, चंदर सिंह, प्रवेश, धर्मेंद्र, लीलू फौजी, राजेश, राजपाल आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को गांव साकरौंद स्थित प्राचीन शिव मंदिर मे किसानों की बैठक हुई। बैठक में किसानों ने बागपत गन्ना मिल अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर कहा कि बांड बनाने के लिए किसानों से प्रतिवर्ष नए सिरे से फर्द, बैंक खाता नंबर, आधार नंबर मांगे जाते है, इसमें किसानों के बहुत रुपये खर्च होते है। मिल अधिकारियों को केवल उन किसानों से कागज लेने चाहिए। जिन्होंने जमीन क्रय या विक्रय की हो या बांड नामित किसान की मृत्यु हो गई है। अनावश्यक कवायद में किसानों को फरद निकलवाने में बागपत, खेकडा तहसील के चक्कर लगाने पड़ते है। साथ ही रुपये भी खर्च करने पड़ते है।
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किसानों ने कहा कि सांकरौद मौजे के किसानों की जमीन, खादर, बांगर, कुतुबपुर वीरान, फखरपुर, गढी आदि में है। कई किसानों ने गांव सुभानपुर में भी जमीन खरीदी हुई है। सबकी अलग अलग फर्द निकलवानी पड़ती है। किसानों ने जिलाधिकारी और जिला गन्नाधिकारी से प्रतिवर्ष कागज लेने की व्यवस्था पर विराम लगाने की मांग की है। ताकि किसानो का आर्थिक नुकसान होने से बच सके। इस दौरान ओमबीर सिंह, चौधरी देवेंद्र धामा, कृष्णपाल सिंह, चंदर सिंह, प्रवेश, धर्मेंद्र, लीलू फौजी, राजेश, राजपाल आदि मौजूद रहे।
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