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हवा में घुल रहा जहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:31 AM IST
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बागपत में शहर की ओर बढ़ता भट्ठे का धुआं।
- फोटो : amar ujala
बागपत जिले में 400 से अधिक भट्टों का धुआं पर्यावरण और हवा में जहर घोल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भट्टों के एक किलोमीटर दायरे में भूमि उपजाऊ नहीं रहती है। धुएं का असर पेड़, पौधों, फसलों और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
ईंट भट्टों से निकलने वाले धुएं में घुली कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें फल पट्टी क्षेत्र को भारी पड़ रही हैं। इनसे पेड़ों की पत्तियां पीली होकर टूटने लगती हैं। धुएं से मानव को दमा, टीबी और फेफड़ों की खराबी, यहां तक कि कैंसर की चपेट में आने की आशंका रहती है। इस संबंध में जिला कृषि रक्षा अधिकारी पवन विश्वकर्मा ने कहा कि भट्टों के आसपास भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
भट्टों को चलाने के लिए समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए। इसके अलावा पॉलिथीन भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है। प्रभावी रोक न लगने के कारण इससे उपजाऊ भूमि बंजर बन रही है। यह जल्दी गलती नहीं है और जलाने पर पर्यावरण को दूषित करती है। विज्ञान प्रसार एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के वैज्ञानिक कपिल त्रिपाठी का कहना है कि फैक्ट्रियों से निकालने वाली आर्सेनिक, मरकरी केडसियम जैसे जहरीले केमिकल कैंसर जैसी बीमारी फैला रहे हैं।
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वहीं साइंस इनोवेशन एंड ह्यूमनिष्ट संस्थान विपनेट क्लब बागपत के निदेशक योगेश कुमार ने भट्टों से निकलने वाले धुएं और कैमिकल पर रोक लगाने का समर्थन किया।
वाहनों से भी हो रहा प्रदूषण
बढ़ती जा रही वाहनों की संख्या ने प्रदूषण को बढ़ा दिया है। दिनभर हजारों वाहन जनपद से गुजरते हैं, जिनसे घातक धुआं निकलता है। यह पर्यावण को दूषित कर रहा है।
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ईंट भट्टों से निकलने वाले धुएं में घुली कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें फल पट्टी क्षेत्र को भारी पड़ रही हैं। इनसे पेड़ों की पत्तियां पीली होकर टूटने लगती हैं। धुएं से मानव को दमा, टीबी और फेफड़ों की खराबी, यहां तक कि कैंसर की चपेट में आने की आशंका रहती है। इस संबंध में जिला कृषि रक्षा अधिकारी पवन विश्वकर्मा ने कहा कि भट्टों के आसपास भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
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भट्टों को चलाने के लिए समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए। इसके अलावा पॉलिथीन भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है। प्रभावी रोक न लगने के कारण इससे उपजाऊ भूमि बंजर बन रही है। यह जल्दी गलती नहीं है और जलाने पर पर्यावरण को दूषित करती है। विज्ञान प्रसार एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के वैज्ञानिक कपिल त्रिपाठी का कहना है कि फैक्ट्रियों से निकालने वाली आर्सेनिक, मरकरी केडसियम जैसे जहरीले केमिकल कैंसर जैसी बीमारी फैला रहे हैं।
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वहीं साइंस इनोवेशन एंड ह्यूमनिष्ट संस्थान विपनेट क्लब बागपत के निदेशक योगेश कुमार ने भट्टों से निकलने वाले धुएं और कैमिकल पर रोक लगाने का समर्थन किया।
वाहनों से भी हो रहा प्रदूषण
बढ़ती जा रही वाहनों की संख्या ने प्रदूषण को बढ़ा दिया है। दिनभर हजारों वाहन जनपद से गुजरते हैं, जिनसे घातक धुआं निकलता है। यह पर्यावण को दूषित कर रहा है।