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कोटा से तीन छात्रों और दो परिजनों की घर वापसी
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बागपत सीएचसी में रोडवेज बस में कोटा के छात्रा-छात्रों को लेकर आए अधिकारी व पुलिसकर्मी
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत। कोचिंग के गढ़ कोटा में पढ़ने गए छात्रों और उनसे मिलने गए परिजनों की घर वापसी हो गई है। जिले के तीन छात्र और दो परिजनों का सीएचसी में रैपिड टेस्ट किया गया, नेगेटिव रिपोर्ट मिली है। एहतियात के तौर पर इन्हें होम क्वारंटीन कर दिया गया है।
रविवार को कोटा से छात्रों और परिजनों की घर वापसी हुई। नगर की महावीर गली का अनुभव कोटा में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वह पिछले एक साल से वहीं रह रहा था। कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद रविवार को बागपत लौटा। नगर के भजन विहार का रहने वाला विकास कुमार कोटा में इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहा था। वह दीवाली पर अपने घर आया था और पर्व के बाद उसकी बहन पूजा भी उसके साथ वहीं चली गई थी। उसके पिता राजीव चौधरी भी बच्चों के पास ही थे। लॉकडाउन होने के कारण तीनों वहीं पर रूक गए थे। रविवार को बागपत पहुंचने पर सीएचसी में रैपिड किट से उनकी जांच की गई। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन कर दिया है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि कोटा से आए पांचों लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। उन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन कर दिया गया है। जांच टीम में डॉ. विकास प्रकाश, डॉ. अभिषेक कुमार, फार्मासिस्ट मनोज कुमार व तपेश त्यागी, लैब टेक्निशियन धर्मेंद्र कुमार रहे।
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केस बढने से टेंशन में थे छात्र
बागपत। भजन बिहार के गौरव व उसकी बहन पूजा का कहना था कि वैसे तो कोई परेशानी नही थी। कोटा में लगातार केस बढ़ रहे थे, जिससे वह व उसकी बहन टेंशन में थे, कि कहीं वह भी कोरोना की चपेट में न आ जाएं। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद काफी राहत महसूस की है।
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डर के साए में जी रहा था गौरव
बागपत। बावली का गौरव कोटा में आईआईटी की पढ़ाई कर रहा था। वह भी पिछले एक वर्ष से वहीं पर रह रहा था। जनवरी माह में एक बार दिल्ली में एग्जाम के लिए आया था। वह हॉस्टल में रहता था। मैस संचालक सभी को खाना पहुंचाता था। उसे डर सताता रहता था कि कहीं मैस के कारण कोरोना पीड़ित न हो जाए। इसके अलावा कोटा में प्रतिदिन दस से 15 केस कोरोना के मिल रहे थे।
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इनसेट
दुश्वारियों का सफर, घर पहुंचकर मिली खुशी
बागपत। छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों ने कहा कि उनका सफर दुश्वारियां भरा रहा। शनिवार दोपहर को मैनपुरी जिले की बेवर डिपो की बस से छात्र-छात्राएं पहुंचे। कोटा से शामली के तीन, बागपत के पांच और मुजफ्फरनगर के 15 छात्र-छात्राएं सवार थे। लॉकडाउन बढने की चिंता के कारण छात्र-छात्राएं अपना अधिकतर सामान वापस ले आए हैं।
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रविवार को कोटा से छात्रों और परिजनों की घर वापसी हुई। नगर की महावीर गली का अनुभव कोटा में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वह पिछले एक साल से वहीं रह रहा था। कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद रविवार को बागपत लौटा। नगर के भजन विहार का रहने वाला विकास कुमार कोटा में इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहा था। वह दीवाली पर अपने घर आया था और पर्व के बाद उसकी बहन पूजा भी उसके साथ वहीं चली गई थी। उसके पिता राजीव चौधरी भी बच्चों के पास ही थे। लॉकडाउन होने के कारण तीनों वहीं पर रूक गए थे। रविवार को बागपत पहुंचने पर सीएचसी में रैपिड किट से उनकी जांच की गई। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन कर दिया है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि कोटा से आए पांचों लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। उन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन कर दिया गया है। जांच टीम में डॉ. विकास प्रकाश, डॉ. अभिषेक कुमार, फार्मासिस्ट मनोज कुमार व तपेश त्यागी, लैब टेक्निशियन धर्मेंद्र कुमार रहे।
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केस बढने से टेंशन में थे छात्र
बागपत। भजन बिहार के गौरव व उसकी बहन पूजा का कहना था कि वैसे तो कोई परेशानी नही थी। कोटा में लगातार केस बढ़ रहे थे, जिससे वह व उसकी बहन टेंशन में थे, कि कहीं वह भी कोरोना की चपेट में न आ जाएं। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद काफी राहत महसूस की है।
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डर के साए में जी रहा था गौरव
बागपत। बावली का गौरव कोटा में आईआईटी की पढ़ाई कर रहा था। वह भी पिछले एक वर्ष से वहीं पर रह रहा था। जनवरी माह में एक बार दिल्ली में एग्जाम के लिए आया था। वह हॉस्टल में रहता था। मैस संचालक सभी को खाना पहुंचाता था। उसे डर सताता रहता था कि कहीं मैस के कारण कोरोना पीड़ित न हो जाए। इसके अलावा कोटा में प्रतिदिन दस से 15 केस कोरोना के मिल रहे थे।
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इनसेट
दुश्वारियों का सफर, घर पहुंचकर मिली खुशी
बागपत। छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों ने कहा कि उनका सफर दुश्वारियां भरा रहा। शनिवार दोपहर को मैनपुरी जिले की बेवर डिपो की बस से छात्र-छात्राएं पहुंचे। कोटा से शामली के तीन, बागपत के पांच और मुजफ्फरनगर के 15 छात्र-छात्राएं सवार थे। लॉकडाउन बढने की चिंता के कारण छात्र-छात्राएं अपना अधिकतर सामान वापस ले आए हैं।
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