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आधी आबादी को सबसे ज्यादा पति से मिल रही एड्स की बीमारी

Wed, 01 Dec 2021 11:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:57 AM IST
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Those who live alone outside the house feel the sting of AIDS
विश्व एड्स दिवस पर विशेष
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पिछले दो साल के मुकाबले इस बार एड्स के सबसे कम मिले है मरीज
वर्ष 2007 में जनपद में मिला था पहला एचआईवी पाजिटिव
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। लापरवाही और जागरूकता का अभाव के चलते लोग ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) की चपेट में आ रहे है। यहीं कारण है कि असुरक्षित यौन संबंध के कारण आधी आबादी को उनके पतियों से यह बीमारी में मिल रही है। एड्स का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। करीब 90 फीसदी मरीजों में यही वजह मिली है। लगभग पांच फीसदी को संक्रमित रक्त चढ़ने से और 5 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्हें पैदाइश से ही यह बीमारी मिली है।
जनपद में वर्ष 2003 में एड्स की जांच शुरू की गई थी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार तीन साल तक कोई भी एड्स से ग्रस्त नहीं आया था। चौथे वर्ष यानी वर्ष 2007 में सबसे पहले एक व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव मिला था। उसके बाद मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। वर्ष 2015-2016 में 25 पुरुष और 12 गर्भवती महिला एड्स से ग्रस्त मिली थी। वर्ष 2016- 2017 में 23 पुरूष व 18 महिला एचआईवी पॉजिटिव मिली।
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350 सीडी फॉर होने पर जकड़ लेती है कई बीमारियां
स्वस्थ शरीर में 800-1200 सीडी फॉर (शक्तिवर्धक कण) होते हैं, एचआईवी इन कणों को नष्ट करने लगता है। 350 सीडी फॉर होने पर कई बीमारी जकड़ लेती हैं। इलाज से मर्ज ठीक नहीं होता।
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दिल्ली, मेरठ, पंजाब व हरियाणा, सोनीपत में करा रहे इलाज
एड्स पीड़ित ऐसे सैकड़ों मरीज जनपद के है, जो यहां के अस्पतालों में इलाज न कराकर दिल्ली, मेरठ, हरियाणा, पंजाब, सोनीपत सहित अन्य राज्यों व जिलों में इलाज करा रहे है। उनका स्वास्थ्य विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है।

लापरवाही से बढ़ रहे मामले
जिला एड्स रोग नियंत्रण अधिकारी व ब्लड बैंक प्रभारी डा अनुराग वार्ण्णेय ने बताया कि काउंसिलिंग में यह पता चला है कि जो लोग घर से बाहर अकेले रहते है, उनमें असुरक्षित यौन के चलते एड्स की बीमार हो रही है। इसके अलावा दूसरे राज्यों व जनपदों में कई-कई दिनों तक ट्रक या अन्य बड़ा वाहन चलाने वाले ट्रक चालक भी इसकी चपेट में आ रहे है। यहीं कारण है कि बाहर असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद जब ट्रक चालक घर लौटकर अपनी पत्नी से संबंध बनाता है तो वे भी एड्स की ग्रस्त में आ रही है। बताया कि एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) एचआईवी के वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकती है। इससे वायरस की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में घबराना नहीं चाहिए, इलाज कराना चाहिए। लोगों के लापरवाही बरतने से एचआईवी के मरीज बढ़ रहे हैं।
ये है वर्षवार आंकड़े
वर्ष जांच एचआईवी केस प्रतिशत
2019 12495 83 0.66
2020 7109 23 0.32
2021 8020 27 0.33
एचआईवी के कारण
- एक से अधिक लोगों के साथ असुरक्षित यौन संबंध से
- एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से
- संक्रमित सुईं एवं सिरिंज के इस्तेमाल से
- एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे को
ये है बचाव के उपाएं-----
- शादी से पहले युवक-युवती एचआईवी जांच कराएं
- असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त सुईं से बचें
- सामान्य व्यक्ति भी बच्चों की जांच कराएं
- पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
- धूम्रपान, मदपान, नशीली दवाओं का सेवन न करें
- व्यायाम करें, शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें
ये है एचआईवी के लक्षण-----
- वजन कम होना और किसी भी बीमारी में दवा का असर न होना
- गले-मुंह में लगातार छाले रहना और उल्टी व दस्त की समस्या
- खुजली, हरपीज और गुप्त रोग होना
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