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बुराई त्यागकर आर्यसमाज के पदचिह्नों पर चलें युवा
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भड़ल गांव में राष्ट्र कल्याण एवं पर्यावरण की शुद्धि के लिए वेद प्रचार सप्ताह मनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। भड़ल गांव में वैदिक युवा विद्वान कपिल शास्त्री के नेतृत्व में राष्ट्र कल्याण एवं पर्यावरण की शुद्धि के लिए गांव में वेद प्रचार सप्ताह मनाया जा रहा हैं। इसमें युवाओं को धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन व बुराइयों को दूर कर आर्यसमाज के पद चिह्नों पर चलने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
कपिल शास्त्री ने कहा कि यज्ञ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह वायुमंडल के शोधन का मुख्य कारक कहलाता है, इससे प्राणियों में आरोग्यता बढ़ती है। उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोगों से मास्क का प्रयोग करने, खांसी, बुखार, शरीर में दर्द होने पर चिकित्सक की सलाह लेने, प्रतिदिन प्राणायाम, व्यायाम करनी चाहिए। वैदिक रीति से यज्ञ के बाद सुंदर वेदपाठ संपन्न हुआ। यज्ञ में ठेकेदार सहेंद्र राणा यज्ञमान रहे । यज्ञ के लिए रोगनाशक सामग्री बनाई। इसमें गुगुल, लोबान, जावित्री, गिलोय, नीम के पत्ते, सरसों, नागरमोथा, अखरोट, बादाम, लांग, इलायची, तेजपात, मखाना, बालछड़, जटामांसी, कपूर अन्य पदार्थ मिलाए । यज्ञ में पंडित देवेंद्र आर्य, प्रेमपाल राणा, मनोज राणा, कंवर पाल, रमेश राणा, सागर राणा, बिल्लू राणा, रामवीर पांचाल मौजूद रहे।
वैदिक परंपरा को अपनाकर जीवन का स्तर होगा ऊंचा
दोघट। आर्य समाज दाहा के तत्वावधान में वैदिक जाग्रति अभियान श्रंखला का आठवां यज्ञ देवेंद्र आर्य के आवास पर हुआ। इसमें आचार्य यशवीर ने कहा कि वैदिक परंपरा को अपना कर देव यज्ञ, अग्नि होत्र यज्ञ और उपासना करने से प्रत्येक क्षेत्र में जीवन स्तर ऊंचा होगा। यज्ञ करने से आत्मिक, सामाजिक, आर्थिक व व्यवहारिक उन्नति के साथ राष्ट्र की भी उन्नति होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। भड़ल गांव में वैदिक युवा विद्वान कपिल शास्त्री के नेतृत्व में राष्ट्र कल्याण एवं पर्यावरण की शुद्धि के लिए गांव में वेद प्रचार सप्ताह मनाया जा रहा हैं। इसमें युवाओं को धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन व बुराइयों को दूर कर आर्यसमाज के पद चिह्नों पर चलने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
कपिल शास्त्री ने कहा कि यज्ञ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह वायुमंडल के शोधन का मुख्य कारक कहलाता है, इससे प्राणियों में आरोग्यता बढ़ती है। उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोगों से मास्क का प्रयोग करने, खांसी, बुखार, शरीर में दर्द होने पर चिकित्सक की सलाह लेने, प्रतिदिन प्राणायाम, व्यायाम करनी चाहिए। वैदिक रीति से यज्ञ के बाद सुंदर वेदपाठ संपन्न हुआ। यज्ञ में ठेकेदार सहेंद्र राणा यज्ञमान रहे । यज्ञ के लिए रोगनाशक सामग्री बनाई। इसमें गुगुल, लोबान, जावित्री, गिलोय, नीम के पत्ते, सरसों, नागरमोथा, अखरोट, बादाम, लांग, इलायची, तेजपात, मखाना, बालछड़, जटामांसी, कपूर अन्य पदार्थ मिलाए । यज्ञ में पंडित देवेंद्र आर्य, प्रेमपाल राणा, मनोज राणा, कंवर पाल, रमेश राणा, सागर राणा, बिल्लू राणा, रामवीर पांचाल मौजूद रहे।
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वैदिक परंपरा को अपनाकर जीवन का स्तर होगा ऊंचा
दोघट। आर्य समाज दाहा के तत्वावधान में वैदिक जाग्रति अभियान श्रंखला का आठवां यज्ञ देवेंद्र आर्य के आवास पर हुआ। इसमें आचार्य यशवीर ने कहा कि वैदिक परंपरा को अपना कर देव यज्ञ, अग्नि होत्र यज्ञ और उपासना करने से प्रत्येक क्षेत्र में जीवन स्तर ऊंचा होगा। यज्ञ करने से आत्मिक, सामाजिक, आर्थिक व व्यवहारिक उन्नति के साथ राष्ट्र की भी उन्नति होगी।
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