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Baghpat News: मेडिकल काॅलेज का रास्ता साफ, चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम होगी जमीन
Tue, 24 Sep 2024 04:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Tue, 24 Sep 2024 04:46 AM IST
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बागपत। मीतली में मेडिकल काॅलेज निर्माण के लिए करीब 67 बीघा जमीन को चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम करने के लिए शासन ने पत्र जारी किया है। इस पर डीएम ने एडीएम व सीएमओ को कार्रवाई कराने के निर्देश दिए हैं। इस तरह मेडिकल काॅलेज को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान भी थम जाएगी।
मीतली में मेडिकल काॅलेज बनाने की घोषणा कई साल पहले हुई थी और उसके लिए करीब 100 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। मेडिकल काॅलेज के लिए मीतली में जमीन देखी गई थी। वहां करीब 67 बीघा जमीन है जो पहले राजस्व विभाग के पास थी और वह रिकॉर्ड में बंजर दर्ज थी। उसे वर्ष 2001 में मत्स्य विभाग के नाम दर्ज कर दिया गया था। जहां मत्स्य विभाग ने करीब एक बीघा में अपना कार्यालय बनाया हुआ है और कुछ जमीन में तालाब की खोदाई कराकर छोड़ा हुआ है। इसका आज तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया।
पिछले साल जमीन राजस्व विभाग के नाम दर्ज करने की कार्रवाई शुरू हुई। इसके लिए प्रशासन ने सभी फाइल पूरी करने के साथ ही पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इस जमीन को रिकॉर्ड में राजस्व विभाग के नाम दर्ज कर दिया गया। इसके साथ ही अब शासन ने इसे राजस्व विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग को देने के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शासन से संयुक्त सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीएम को पत्र भेजा है। इसके बाद डीएम ने एडीएम व सीएमओ को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया।
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मत्स्य विभाग के जमीन दर्ज होने की चल रही जांच
राजस्व विभाग में बंजर में दर्ज भूमि को किस आदेश के तहत वर्ष 2001 में मत्स्य विभाग को दिया गया था। जब मत्स्य विभाग उस भूमि का इस्तेमाल नहीं कर रहा है तो क्या उसको लेकर आदेश निरस्त होने चाहिए थे। जिस श्रेणी 6 के तहत उस भूमि को मत्स्य विभाग को दिया गया है, उसमें भूमिधरी अधिकार नहीं होते है। ऐसे में अभी तक उसको लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस पर भी शासन ने जांच शुरू कराई जो अभी तक चल रही है।
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मीतली में मेडिकल काॅलेज के लिए जमीन को चिकित्सा शिक्षा विभाग को देने के लिए प्रक्रिया शुरू करने को पत्र आया है। इसमें सभी कागज देखे जा रहे हैं, जिससे कार्रवाई शुरू की जा सके। - पंकज वर्मा, एडीएम
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मीतली में मेडिकल काॅलेज बनाने की घोषणा कई साल पहले हुई थी और उसके लिए करीब 100 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। मेडिकल काॅलेज के लिए मीतली में जमीन देखी गई थी। वहां करीब 67 बीघा जमीन है जो पहले राजस्व विभाग के पास थी और वह रिकॉर्ड में बंजर दर्ज थी। उसे वर्ष 2001 में मत्स्य विभाग के नाम दर्ज कर दिया गया था। जहां मत्स्य विभाग ने करीब एक बीघा में अपना कार्यालय बनाया हुआ है और कुछ जमीन में तालाब की खोदाई कराकर छोड़ा हुआ है। इसका आज तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया।
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पिछले साल जमीन राजस्व विभाग के नाम दर्ज करने की कार्रवाई शुरू हुई। इसके लिए प्रशासन ने सभी फाइल पूरी करने के साथ ही पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इस जमीन को रिकॉर्ड में राजस्व विभाग के नाम दर्ज कर दिया गया। इसके साथ ही अब शासन ने इसे राजस्व विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग को देने के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शासन से संयुक्त सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीएम को पत्र भेजा है। इसके बाद डीएम ने एडीएम व सीएमओ को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया।
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मत्स्य विभाग के जमीन दर्ज होने की चल रही जांच
राजस्व विभाग में बंजर में दर्ज भूमि को किस आदेश के तहत वर्ष 2001 में मत्स्य विभाग को दिया गया था। जब मत्स्य विभाग उस भूमि का इस्तेमाल नहीं कर रहा है तो क्या उसको लेकर आदेश निरस्त होने चाहिए थे। जिस श्रेणी 6 के तहत उस भूमि को मत्स्य विभाग को दिया गया है, उसमें भूमिधरी अधिकार नहीं होते है। ऐसे में अभी तक उसको लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस पर भी शासन ने जांच शुरू कराई जो अभी तक चल रही है।
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मीतली में मेडिकल काॅलेज के लिए जमीन को चिकित्सा शिक्षा विभाग को देने के लिए प्रक्रिया शुरू करने को पत्र आया है। इसमें सभी कागज देखे जा रहे हैं, जिससे कार्रवाई शुरू की जा सके। - पंकज वर्मा, एडीएम