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जिला अस्पताल में नहीं सुधर रही व्यवस्था, खून की जांच की मशीन खराब
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कोर्ट रोड निवासी बाबू खान
- फोटो : BAGHPAT
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मरीजों को मजबूरी में जांच के लिए प्राइवेट लैब में खर्च करने पड़ रहे 300-600 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं नहीं सुधर रही है। खून की जांच की मशीनें खराब होने पर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लोगों को 300 से 600 रुपये खर्च कर प्राइवेट लैब में जांच कराने के लिए विवश होना पड़ा रहा है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल में आए दिन मशीनें खराब पड़ी रहती है, जिससे लोगों को दिक्कत उठानी पड़ती है। मशीन खराब होने से लीवर और किडनी की जांच बंद पड़ी है। जिला अस्पताल से लोगों को बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में जांच कराने पहुंचे कोर्ट रोड बागपत के बाबू खान ने बताया कि चिकित्सक के परामर्श पर वह जांच कराने आए थे, मगर मशीन खराब होने के कारण उसे प्राइवेट लैब में जांच करानी पड़ेगी। जांच कराने में उसके दो हजार रुपये खर्च हो गए। बिलौचपुरा के आरिफ ने बताया कि वह अपनी मां शकीला की खून की जांच कराने के लिए जिला अस्पताल आया था, मगर मगर उसे मशीन खराब होने के कारण जांचे नहीं हो पाई है।
प्राइवेट लैब में जांच कराने पर ढीली हो रही जेब
जिला अस्पताल की मशीनें खराब होने के कारण मरीजों को प्राइवेट लैब में जांच करने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। इमरजेंसी में जांच कराने वाले मरीजों को प्राइवेट लैब में एक जांच पर 300 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं नहीं सुधर रही है। खून की जांच की मशीनें खराब होने पर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लोगों को 300 से 600 रुपये खर्च कर प्राइवेट लैब में जांच कराने के लिए विवश होना पड़ा रहा है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल में आए दिन मशीनें खराब पड़ी रहती है, जिससे लोगों को दिक्कत उठानी पड़ती है। मशीन खराब होने से लीवर और किडनी की जांच बंद पड़ी है। जिला अस्पताल से लोगों को बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में जांच कराने पहुंचे कोर्ट रोड बागपत के बाबू खान ने बताया कि चिकित्सक के परामर्श पर वह जांच कराने आए थे, मगर मशीन खराब होने के कारण उसे प्राइवेट लैब में जांच करानी पड़ेगी। जांच कराने में उसके दो हजार रुपये खर्च हो गए। बिलौचपुरा के आरिफ ने बताया कि वह अपनी मां शकीला की खून की जांच कराने के लिए जिला अस्पताल आया था, मगर मगर उसे मशीन खराब होने के कारण जांचे नहीं हो पाई है।
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प्राइवेट लैब में जांच कराने पर ढीली हो रही जेब
जिला अस्पताल की मशीनें खराब होने के कारण मरीजों को प्राइवेट लैब में जांच करने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। इमरजेंसी में जांच कराने वाले मरीजों को प्राइवेट लैब में एक जांच पर 300 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे।
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