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Baghpat News: भक्ति का रंग खूब चढ़ेगा, पर्यावरण भी बचेगा

Wed, 04 Feb 2026 01:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Feb 2026 01:25 AM IST
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The spirit of devotion will flourish, and the environment will also be protected.
बागपत। इस बार पुरा महादेव के परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पर भक्ति का खूब रंग चढ़ेगा तो पर्यावरण भी बचेगा। वहां 14-16 फरवरी तक लगने वाले फाल्गुनी मेले से निकलने वाले कबाड़ से बेंच, डस्टबिन, अगरबत्ती, धूपबत्ती और मैट बनाए जाएंगे।
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पुरा महादेव में ऐतिहासिक परशुरामेश्वर महादेव मंदिर है, यहां हर साल फाल्गुनी व श्रावणी मेला लगता है। इस दौरान हर साल लाखों कांवड़िये व श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं, क्योंकि इस मंदिर की मान्यता अन्य राज्यों तक है। इसलिए बागपत समेत आसपास के कई जिलों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तक के श्रद्धालु यहां आते हैं।
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मेले के बाद पानी की प्लास्टि की बोतलें, श्रद्धालुओं की चप्पलों के अलावा वहां चढ़ाए जाने वाले फूल व पत्तियां फैली रहती हैं। वहां से एकत्र करके इसको फेंक दिया जाता है, मगर प्लास्टिक व चप्पल नहीं गलने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
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इसको देखते हुए डीएम अस्मिता लाल ने इस बार लगने वाले मेले के बाद निकलने वाले कबाड़ से उत्पाद बनवाने की योजना बनाई है। इसके लिए फैक्टरी मालिकों से बात हो गई है, जो इस कार्य को करेंगे। इसकी थीम भक्ति भी और प्रकृति भी रखी गई है। इस तरह जीरो वेस्ट महाशिवरात्रि पर कार्य शुरू कर दिया गया है।
-इस तरह जमा होगा कबाड़
वहां नीली, पीली, लाल, हरे रंग की बड़ी डस्टबिन रखी जाएंगी। सफाई कर्मियों व वालंटियर को लगाया जाएगा। नीले रंग की डस्टबिन में प्लास्टिक की बोतल व अन्य चीजों को एकत्र कराया जाएगा। पीली डस्टबिन में चप्पलों, लाल में कपड़े व अन्य, हरे में फूल व पत्तों के साथ ही खाद्य सामग्री एकत्र कराई जाएगी।

ऐसे बनाए जाएंगे उत्पाद
-बोतलों व अन्य प्लास्टिक के सामान को गलाकर सामान्य बेंच, सजावटी सामान, पार्कों की बेंच, डस्टबिन बनाए जाएंगे।
-चप्पलों व रबड़ को गलाकर जमीन पर बिछाने के लिए मैट बनाए जाएंगे, जो आंगनबाड़ी केंद्रों में इस्तेमाल किए जाएंगे।
-फूलों व पत्तों से अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाई जाएगी।
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पुरा महादेव मंदिर पर प्लास्टिक की बोतल, चप्पलों, फूल व पत्तियों जैसी वेस्ट चीजों से सामान बनवाए जाएंगे। उन सामान को इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस तरह पर्यावरण संरक्षण किया जा सकेगा। यह प्रयोग सफल होता है तो इसका भविष्य में बड़ा फायदा मिलेगा। -अस्मिता लाल, डीएम
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