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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   The problem in Ramgarh

घुट-घुट के जी रहे रामगढ़ के लोग

Thu, 23 Jun 2016 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दोघट
ब्यूरो/अमर उजाला, दोघट Updated Thu, 23 Jun 2016 12:36 AM IST
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The problem in Ramgarh
रामगढ़ गांव में झोपड़ी बनाकर रहता परिवार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सिरसली गांव के मजरे रामगढ़ में सिकलीगर बिरादरी के लोगों को अभी तक भी जाति प्रमाणपत्र नहीं बनता है। इस  कारण बिरादरी के सैकड़ों लोग  केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से वंचित हैं। 
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मजरे में करीब 50 परिवार सिकलीगर बिरादरी  के लोग रहते हैं। सूत्रों के अनुसार जिनके प्रमाणपत्र नहीं बनते हैं। खुले घरों में रहते हैं। शौचालय नहीं होने से ग्रामीणों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। शिक्षा का अभाव है। गांव में सिकलीगर बिरादरी के सभी परिवार झोपड़ी में ही रह रहे हैं। गांव के मिथलेश के पास मकान ही नहीं है। वह अपने बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे ही जीवन यापन कर रहा है। 
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गांव बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग की सड़क से लगभग पांच सौ मीटर दूर बसा है रामगढ़। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार करीब पांच सौ वर्ष पूर्व रामगढ़ गांव को बसाया गया था। इसमें जाट, ब्राह्मण, पुरी के अलावा सिकलीगर जाति के परिवार रहते हैं। केवल दो-चार परिवार के राशन कार्ड बने हैं। प्राथमिक विद्यालय में लगा         हैंडपंप खराब पड़ा है, इस कारण स्कूल में पढ़ने और पढ़ाने वालों को अन्य स्थान में जानकर प्यास बुझानी पड़ती है। 
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ग्रामीण सुखवीर, हरपाल, संतोष, जगपाल, रामवीर, चंदर, नवाब, कदम, नहार सिंह, इतवारी, सुमेर, अशोक आदि ने बताया गांववासी दो किलोमीटर पैदल कच्चे रास्ते से चलकर सिरसली से राशन लाते हैं। गांव स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, गांव में पशु अस्पताल तक नहीं बना। इसके अलावा गांव डाकघर या बैंक की शाखा भी नहीं है।

गांवों को बैंक खाता खोलने के लिए सात किलोमीटर दूर जौहड़ी में जाना पड़ता है। सरकारी स्वास्थ्य संबंधी सुविधा लेने के लिए  15 किलोमीटर दूर बिनौली स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। गांव के आने का दो किमी का रास्ता भी कच्चा है। गांव में वृद्धा, विधवा, विकलांग पेंशन के पात्र लोगों को पेंशन नहीं मिलती है। लोगों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बनते हैं। 

क्या कहते हैं ग्राम प्रधान
सिरसली गांव के प्रधान राजू तोमर ने बताया जर्जर लाइन को बदलने के लेकर विद्युत विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पक्के मकान बनाने के लिए ग्रामीण जिलाधिकारी को कई बार प्रार्थना पत्र दे चुके हैं, लेकिन मकान नहीं बने है।


पेंशन की जरूरत है। राशन कार्ड भी पूरे नहीं बने हैं।  सिकलीगर जाति के जाति प्रमाण पत्र तहसील से नहीं बनाए जाते, बनने चाहिए। उन्होंने बताया गांव में 15 राशन कार्ड बने हैं। इनमें से चार सिगलीगर जाति के परिवार के बने हैं। 
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