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नीम हकीम खतरा-ए-जान से बन गई टीबी रोगी की पहचान

Sun, 20 Mar 2022 10:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 10:27 PM IST
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The identity of the TB patient became due to the quack Khatra-e-Jaan
बिनौली गांव में सर्वे के दौरान महिलाओं से जानकारी लेती स्वास्थ्य विभाग की टीम - फोटो : BARAUT
31 मरीजों में हुई टीबी रोग की पुष्टि, ज्यादातर बिना जांच और चिकित्सक की सलाह के खा रहे थे दवाई
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09 मार्च से स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी रोगी की पहचान के लिए किए गए सर्वे में हुआ खुलासा
22 मार्च तक चलेगा स्वास्थ्य विभाग का टीबी रोगी की पहचान के लिए सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। एक कहावत है नीम हकीम खतरा ए जान... यानि अयोग्य चिकित्सकों से इलाज कराना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी के रोगियों की पहचान के लिए नौ मार्च से शुरू किए गए सर्वे में। इस सर्वे में टीबी के 31 नए मरीज मिले है। इनमें से ज्यादातर मरीज ऐसे है जो बुखार, सिर दर्द, बदन में दर्द, खांसी, सांस फूलने जैसी बीमारियों का इलाज मेडिकल स्टोर से दवाई लेकर कर रहे थे। इन लोगों ने न तो कभी जांच कराई और न ही चिकित्सकों से सलाह ली। इसका नतीजा यह हुआ कि टीबी जैसा रोग शरीर में घर कर गया। अब बीमारी का पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग ने इन लोगों का उपचार शुरू किया है।
सोशल मीडिया पर पढ़कर या देख-सुनकर खुद ही दवाएं लेना नुकसानदायक
सीएमओ डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेना आमतौर पर ठीक नहीं रहता है। लंबे समय तक खांसी, बलगम आना, भूख कम लगना, पेट दर्द जैसी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह पर एक्सरे और जरूरी जांच अवश्य कराएं। मधुमेह (डायबिटीज), घर के बाहर रहने वाले किशोरों जो समय पर खाना नहीं खा पाते, स्तनपान कराने वाली महिलाएं जो समुचित पौष्टिक आहार नहीं लेती और मानसिक बीमारियों से पीड़ित मरीज में टीबी होने का जोखिम ज्यादा होता है। बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह या सोशल मीडिया पर पढ़कर या देख सुनकर खुद ही दवाएं लेना उचित नहीं है।
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किडनी व लीवर समेत विभिन्न अंगों पर पड़ता है विपरीत असर
डिप्टी सीएमओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं के अत्यधिक सेवन से कई मरीजों में टीबी की स्थिति खतरनाक हो रही है। बिना बीमारी को जाने अत्यधिक दवाएं लेने से बीमारी ठीक होने की बजाय बढ़ने लगती है। दरअसल, इस स्थिति में मरीज के शरीर में बहुत सी दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगती है। इसे कम क्षमता की दवा असर नहीं करती हैं। ऐसे में मरीज को अधिक क्षमता की दवाएं देनी पड़ती हैं। अधिक क्षमता की एंटीबायोटिक दवाएं देने से किडनी और लीवर समेत विभिन्न अंगों पर विपरीत असर पड़ता है। इस वजह से मरीज को अस्पताल में भर्ती करने, जांच, ठीक होने के समय और खर्च भी अधिक बढ़ जाता है।
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मेडिकल स्टोर संचालक दरकिनार कर रहे आदेश
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. यशवीर सिंह के अनुसार सभी दवा विक्रेताओं को इस बारे में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह निर्धारित दवाओं को किसी को भी बिना डॉक्टर की सलाह के न दें। मगर, कुछ को छोड़कर ज्यादातर मेडिकल स्टोर संचालक आदेशों को दरकिनार कर लोगों को दवाई दे रहे है।
जनपद में 252 टीबी के मरीज करा रहे इलाज
नौ मार्च से स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे अभियान शुरू किया था, जो 22 मार्च तक चलेगा। अभियान का एक दिन शेष बचा हुआ है, लेकिन अभी तक जनपद में 31 नए मरीज टीबी के मिले है। जनपद में पहले से ही 252 लोग टीबी का इलाज करा रहे है।

यह लक्षण हो तो कराएं टीबी की जांच
लंबे समय तक छाती में दर्द रहना, खून के साथ बलगम आना, शरीर में सुस्ती और थकावट, अत्यधिक पसीना, बुखार, भूख न लगना, मांसपेशियों में दर्द, सांस फूलना, सूखी या बलगम वाली खांसी और बिना कारण वजन में कमी होने की शिकायत लगे तो अस्पताल जाकर टीबी की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर दवाएं लें।
जिले में टीबी मरीजों की स्थिति
सीएचसी कुल मरीज नए मरीज
बड़ौत 40 10
बिनौली 40 6
बागपत 172 15
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