छपरौली (बागपत)। बदरखा में यमुना नदी में डूबे राजमिस्त्री की दूसरे दिन भी तलाश की गई। एनडीआरएफ की टीम जुटी रही। हालात देखिए, जहां छह लोग यमुना में डूब गए, चार की जान बची, एक लाश मिली और एक डूबे युवक की तलाश चल रही है, उसी जगह क्षेत्र के किसान अपनी जिंदगी दांव पर लगाने को मजबूर हो गए हैं।
छपरौली और बदरखा गांव के किसानों ने नदी के दूसरी तरफ गेहूं की फसल बोई थी। थ्रेसिंग करा ली, अब घर तक भूसा वह अनाज लाए तो कैसे। ऊपर से हादसा भी हो गया। यमुना में मौत का सामना करने के लिए तैयार किया गया जुगाड़। ट्रैक्टर के पहिये की छह बड़ी ट्यूब पर लकड़ी के फट्टे और बांस रखे गए। इन पर रखी गई भूसे की 22 गठरी। छपरौली के किसान शहजाद का कहना है कि इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था। डर तो लगता है, लेकिन वह कर भी क्या सकते हैं। सिर्फ शहजाद ही नहीं बल्कि आसपास के गांव के किसान रोजाना यमुना नदी पार कर खेती करने को मजबूर हैं।

छपरौली यमुना के रास्ते भूसा लेकर आते किसान- फोटो : BAGHPAT