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कोरोना संक्रमण से मौत के आंकड़ों में खेल
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बागपत। कोरोना संक्रमण से मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के कारनामों का खुलासा हो रहा है। पहले जिंदा लोगों को कोरोना संक्रमण से मृत दर्शाया। वहीं, अब खुलासा हुआ कि कोरोना संक्रमण से मौत का आंकड़ा छिपाने का खेल किया गया। अब मुआवजे के लिए 100 से ज्यादा ऐसे ेआवेदन आए हैं। जो संक्रमण की रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र लेकर भटक रहे हैं।
कोरोना संक्रमण से मरने वालों के आश्रितों को 50 हजार रुपये मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग के नित नए कारनामों का खुलासा हो रहा है। पहले कोरोना संक्रमण से मृत दर्शाए जीवित मिलेे। अब मौत का आंकड़ा छिपाया जाना सामने आया है। इसके चलते मृतकों को रिकार्ड में दर्ज नहीं किया। ऐसे करीब 100 से ज्यादा आवेदन स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के पास पहुंचे हैं। जिनके परिजन की कोराना संक्रमण से मौत हुई है। इसके बावजूद उनके नाम सूची में नहीं हैं। जिसके आधार पर मृतक आश्रितों को मुआवजा दिया जा रहा है।
पत्नी का सूची में नाम नहीं
गौरीपुर जवाहरनगर निवासी पवन ने बताया कि पत्नी मुनेश को बीती 30 अप्रैल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तथा एक मई को मौत हो गई। उसके पास अस्पताल का रिकार्ड है। इसके बावजूद पत्नी का नाम कोरोना से मरने वालों की सूची में नहीं है।
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अस्पताल में मौत हुई
झूंडपुर गांव के विनय ने बताया कि पिता सुरेंद्र शर्मा को कोरोना संक्रमित होने पर खेकड़ा के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी 18 मई को मौत हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना संक्रमण लिखा है। इसके बावजूद उनका नाम मृतकों की सूची में नहीं है।
पत्नी भटकने के लिए मजबूर
बड़ौत की शताब्दी नगर निवासी मधु खोखर ने बताया कि पति वीरेंद्र कुमार को 23 अप्रैल को शामली के अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी 26 अप्रैल को कोरोना संक्रमण के चलतेे मौत हो गई। अधिकारियों को वहां के सभी कागज दिखा दिए परंतु मानने को तैयार नहीं हैं।
आवेेदन शासन को भेजेंगे
मुआवजे के लिए ऐसे करीब सौ आवेदन आए हैं। जिनके नाम मृतकों की सूची में नहीं हैं। उन सभी के आवेदन लिए जा रहे हैं। उन्हें शासन को भेजा जाएगा। उम्मीद है कि उन्हें भी मुआवजा मिलेगा।-डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ
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कोरोना संक्रमण से मरने वालों के आश्रितों को 50 हजार रुपये मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग के नित नए कारनामों का खुलासा हो रहा है। पहले कोरोना संक्रमण से मृत दर्शाए जीवित मिलेे। अब मौत का आंकड़ा छिपाया जाना सामने आया है। इसके चलते मृतकों को रिकार्ड में दर्ज नहीं किया। ऐसे करीब 100 से ज्यादा आवेदन स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के पास पहुंचे हैं। जिनके परिजन की कोराना संक्रमण से मौत हुई है। इसके बावजूद उनके नाम सूची में नहीं हैं। जिसके आधार पर मृतक आश्रितों को मुआवजा दिया जा रहा है।
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पत्नी का सूची में नाम नहीं
गौरीपुर जवाहरनगर निवासी पवन ने बताया कि पत्नी मुनेश को बीती 30 अप्रैल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तथा एक मई को मौत हो गई। उसके पास अस्पताल का रिकार्ड है। इसके बावजूद पत्नी का नाम कोरोना से मरने वालों की सूची में नहीं है।
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अस्पताल में मौत हुई
झूंडपुर गांव के विनय ने बताया कि पिता सुरेंद्र शर्मा को कोरोना संक्रमित होने पर खेकड़ा के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी 18 मई को मौत हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना संक्रमण लिखा है। इसके बावजूद उनका नाम मृतकों की सूची में नहीं है।
पत्नी भटकने के लिए मजबूर
बड़ौत की शताब्दी नगर निवासी मधु खोखर ने बताया कि पति वीरेंद्र कुमार को 23 अप्रैल को शामली के अस्पताल में भर्ती कराया था। उनकी 26 अप्रैल को कोरोना संक्रमण के चलतेे मौत हो गई। अधिकारियों को वहां के सभी कागज दिखा दिए परंतु मानने को तैयार नहीं हैं।
आवेेदन शासन को भेजेंगे
मुआवजे के लिए ऐसे करीब सौ आवेदन आए हैं। जिनके नाम मृतकों की सूची में नहीं हैं। उन सभी के आवेदन लिए जा रहे हैं। उन्हें शासन को भेजा जाएगा। उम्मीद है कि उन्हें भी मुआवजा मिलेगा।-डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ