{"_id":"58640bfd4f1c1b445ceeb938","slug":"the-disaster-killed-50-days-and-five","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोट बंदी : आफत के 50 दिन और पांच मौत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोट बंदी : आफत के 50 दिन और पांच मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:31 AM IST
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कलक्ट्रेट स्थित सिंडिकेट बैंक के बाहर नगदी के लिए हंगामा करते लोग।
- फोटो : amar ujala
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बागपत। नोट बंदी के पचास दिन बीत गए। लोगों की जेबें ढीली हुई, लाठियां पड़ी और जान तक चली गई, लेकिन बैंक और एटीएम से मनमाफिक नकदी नहीं मिल सकी। एटीएम खराब रहे, बैंकों पर ताले पड़ गए। बैंक कर्मचारियों को थाने में शरण लेनी पड़ी। पंचायतें तक हुई और पुलिस-प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। लोगों पर लाठियां भांजने वाले सिपाहियों पर कार्रवाई की गई। इंस्पेक्टर सिंघावली अहीर को लाइन हाजिर किया। लोगों के पास पुराने नोट लगभग खत्म हो चुके हैं, अब भीड़ केवल कैश लेने के लिए ही बैंकों और एटीएम के चक्कर काट रही है, लेकिन यहां राहत मिलती नहीं दिख रही।
परिवहन विभाग के लिए पहले मीठी, अब खट्टी
नोट बंदी परिवहन विभाग के लिए नवंबर माह में मीठी तो दिसंबर में खट्टी साबित हुई। प्रभारी एआरटीओ आरपी मिश्रा बताते हैं कि नवंबर में पुराने नोट जमा होने के बाद रोड टैक्स टारगेट से भी कहीं ज्यादा जमा हो गया। टारगेट के सापेक्ष करीब 25 फीसदी टैक्स अधिक जमा होने से विभाग को राहत मिली, यही नहीं इसके लिए कोई ज्यादा प्रयास नहीं करने पड़े। इसके उलट दिसंबर में जैसे ही लोगों के पास पुराने नोट खत्म हुआ टारगेट पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है। दिसंबर का लक्ष्य करीब 60 फीसदी ही हो सका है, क्योंकि लोगों को बैंकों से रुपये नहीं मिले, इस कारण टैक्स जमा नहीं हुआ। नवंबर में विभाग पुराने नोट स्वीकार कर रहा था।
विद्युत निगम को 20 करोड़ रुपये का लाभ
नोट बंदी से जिन विभागों की चांदी रही, उनमें विद्युत निगम भी है। यहां पुराने नोट स्वीकार किए। नोट बंदी के बाद से ही निगम ने जिले में प्रचार किया कि पुराने नोट स्वीकार किए जा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता वीके पांडेय ने बताया नोट बंदी के बाद निगम में करीब 20 करोड़ रुपये लोगों ने बिजली बिल के जमा कराए हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। जैसे ही पुराने नोटों को स्वीकार करना बंद किया, बिल जमा करने वालों की संख्या में भी कमी आई।
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सूने-सूने रहे रजिस्ट्री ऑफिस
नोट बंदी के कारण रजिस्ट्री ऑफिसों का कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। पुराने नोटों से लेन-देन करने से यहां लोग बचते दिखे। हालांकि दिसंबर के बाद बैनामा की संख्या पटरी पर लौटती दिखी, लेकिन नवंबर में यहां व्यवस्था बेपटरी ही रही।
स्थानीय निकास को 10 लाख का लाभ
नोट बंदी के बाद स्थानीय निकाय (नगर पालिका और नगर पंचायत) में हाउस टैक्स और वाटर टैक्स का करीब 10 लाख रुपये बकाया जमा हुआ। पालिका ने पुराने नोट स्वीकार किए, लेकिन जैसे ही पुराने नोट स्वीकार किया जाना बंद किया, टैक्स जमा करने वालों की संख्या में भी कमी देखने को मिली। पालिका ने अब लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
कृषि विभाग से किसानों ने खूब खरीदे बीज
कृषि विभाग को भी नोट बंदी से लाखों रुपये का लाभ हुआ। जिले में छह राजकीय बीज भंडार हैं। पुराने नोट के बदले किसानों को बीज और खाद खरीदा। पुराने नोटों से खरीददार किसानों की संख्या इतनी बढ़ी कि विभाग में लाखों रुपये जमा हो गए। सूत्रों के अनुसार विभाग में पांच-पांच सौ के करीब पांच हजार और एक - एक हजार के करीब आठ सौ नोट जमा हुए।
नोटबंदी से पांच लोगों की गई जान
बागपत में नोटबंदी से कहीं न कहीं प्रभावित रहे पांच लोगों की जान भी गई। निवाड़ा में अहसान, कोताना में सलेक, रटौल में दिलशाद, शेखपुरा में यामीन और पुराना कस्बे का शमशेर राव की जान गई। इनमें कोताना का सलेक बैंक के अंदर ही गश खाकर गिर पड़ा था, वहां से उसे अस्पताल ले जाया गया और वहां उसकी मौत हो गई।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पीवी राजू ने बताया लोगों को कैश उपलब्ध कराने के लिए भरपूर प्रयास किए। कैश वितरण की व्यवस्था लगभग ठीक रही। अब बैंकों में भीड़ नहीं है।
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परिवहन विभाग के लिए पहले मीठी, अब खट्टी
नोट बंदी परिवहन विभाग के लिए नवंबर माह में मीठी तो दिसंबर में खट्टी साबित हुई। प्रभारी एआरटीओ आरपी मिश्रा बताते हैं कि नवंबर में पुराने नोट जमा होने के बाद रोड टैक्स टारगेट से भी कहीं ज्यादा जमा हो गया। टारगेट के सापेक्ष करीब 25 फीसदी टैक्स अधिक जमा होने से विभाग को राहत मिली, यही नहीं इसके लिए कोई ज्यादा प्रयास नहीं करने पड़े। इसके उलट दिसंबर में जैसे ही लोगों के पास पुराने नोट खत्म हुआ टारगेट पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है। दिसंबर का लक्ष्य करीब 60 फीसदी ही हो सका है, क्योंकि लोगों को बैंकों से रुपये नहीं मिले, इस कारण टैक्स जमा नहीं हुआ। नवंबर में विभाग पुराने नोट स्वीकार कर रहा था।
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विद्युत निगम को 20 करोड़ रुपये का लाभ
नोट बंदी से जिन विभागों की चांदी रही, उनमें विद्युत निगम भी है। यहां पुराने नोट स्वीकार किए। नोट बंदी के बाद से ही निगम ने जिले में प्रचार किया कि पुराने नोट स्वीकार किए जा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता वीके पांडेय ने बताया नोट बंदी के बाद निगम में करीब 20 करोड़ रुपये लोगों ने बिजली बिल के जमा कराए हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। जैसे ही पुराने नोटों को स्वीकार करना बंद किया, बिल जमा करने वालों की संख्या में भी कमी आई।
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सूने-सूने रहे रजिस्ट्री ऑफिस
नोट बंदी के कारण रजिस्ट्री ऑफिसों का कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। पुराने नोटों से लेन-देन करने से यहां लोग बचते दिखे। हालांकि दिसंबर के बाद बैनामा की संख्या पटरी पर लौटती दिखी, लेकिन नवंबर में यहां व्यवस्था बेपटरी ही रही।
स्थानीय निकास को 10 लाख का लाभ
नोट बंदी के बाद स्थानीय निकाय (नगर पालिका और नगर पंचायत) में हाउस टैक्स और वाटर टैक्स का करीब 10 लाख रुपये बकाया जमा हुआ। पालिका ने पुराने नोट स्वीकार किए, लेकिन जैसे ही पुराने नोट स्वीकार किया जाना बंद किया, टैक्स जमा करने वालों की संख्या में भी कमी देखने को मिली। पालिका ने अब लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
कृषि विभाग से किसानों ने खूब खरीदे बीज
कृषि विभाग को भी नोट बंदी से लाखों रुपये का लाभ हुआ। जिले में छह राजकीय बीज भंडार हैं। पुराने नोट के बदले किसानों को बीज और खाद खरीदा। पुराने नोटों से खरीददार किसानों की संख्या इतनी बढ़ी कि विभाग में लाखों रुपये जमा हो गए। सूत्रों के अनुसार विभाग में पांच-पांच सौ के करीब पांच हजार और एक - एक हजार के करीब आठ सौ नोट जमा हुए।
नोटबंदी से पांच लोगों की गई जान
बागपत में नोटबंदी से कहीं न कहीं प्रभावित रहे पांच लोगों की जान भी गई। निवाड़ा में अहसान, कोताना में सलेक, रटौल में दिलशाद, शेखपुरा में यामीन और पुराना कस्बे का शमशेर राव की जान गई। इनमें कोताना का सलेक बैंक के अंदर ही गश खाकर गिर पड़ा था, वहां से उसे अस्पताल ले जाया गया और वहां उसकी मौत हो गई।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पीवी राजू ने बताया लोगों को कैश उपलब्ध कराने के लिए भरपूर प्रयास किए। कैश वितरण की व्यवस्था लगभग ठीक रही। अब बैंकों में भीड़ नहीं है।