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मंदिर स्वयं से स्वयं का नाता जोड़ने का माध्यम : अतिवीर मुनि
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित धर्म सभा में आचार्य अतिवीर मुनिराज ने कहा कि मंदिर स्वयं से स्वयं का नाता जोड़ने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है। जब तक हम स्वयं से स्वयं का नाता नहीं जोड़ेंगे, तब तक हम चारों गतियों में दौड़ लगाते रहेंगे। कभी भी सच्चे आनंद को प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
आचार्य अतिवीर मुनिराज ने कहा कि धर्म की प्रथम सीढ़ी सम्यक दर्शन है। जिनेंद्र प्रभु किसी भी कार्य में कर्ता नहीं है, वह तो अष्ट कर्मों से मुक्त हो चुके है। उन्होंने अपनी आत्मा में स्थित अनंत गुणों को प्रकट कर लिया है। हमें जिन प्रतिमा का आवलंबन लेकर स्वयं के आत्मगुणों को प्रकट करना चाहिए। सभी को भगवान वीतराग के बताए मार्ग पर चलकर सच्चे सुख को प्राप्त करना चाहिए। स्वयं को आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा में अग्रसर करना चाहिए, तभी मानव कल्याण संभव है। इस दौरान नरेश जैन, समीर जैन दिल्ली, सुमेर जैन, जिनेश जैन, अंकुश जैन, नमन जैन, आकाश जैन, मोहित जैन, शुभम जैन, आशीष जैन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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खेकड़ा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित धर्म सभा में आचार्य अतिवीर मुनिराज ने कहा कि मंदिर स्वयं से स्वयं का नाता जोड़ने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है। जब तक हम स्वयं से स्वयं का नाता नहीं जोड़ेंगे, तब तक हम चारों गतियों में दौड़ लगाते रहेंगे। कभी भी सच्चे आनंद को प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
आचार्य अतिवीर मुनिराज ने कहा कि धर्म की प्रथम सीढ़ी सम्यक दर्शन है। जिनेंद्र प्रभु किसी भी कार्य में कर्ता नहीं है, वह तो अष्ट कर्मों से मुक्त हो चुके है। उन्होंने अपनी आत्मा में स्थित अनंत गुणों को प्रकट कर लिया है। हमें जिन प्रतिमा का आवलंबन लेकर स्वयं के आत्मगुणों को प्रकट करना चाहिए। सभी को भगवान वीतराग के बताए मार्ग पर चलकर सच्चे सुख को प्राप्त करना चाहिए। स्वयं को आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा में अग्रसर करना चाहिए, तभी मानव कल्याण संभव है। इस दौरान नरेश जैन, समीर जैन दिल्ली, सुमेर जैन, जिनेश जैन, अंकुश जैन, नमन जैन, आकाश जैन, मोहित जैन, शुभम जैन, आशीष जैन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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