{"_id":"6202bae35d4c9e54115c6a57","slug":"tb-will-be-identified-by-the-way-of-coughing-baghpat-news-mrt5761924187","type":"story","status":"publish","title_hn":"खांसने के तरीके से होगी टीबी की पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खांसने के तरीके से होगी टीबी की पहचान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- मोबाइल एप ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ से की जाएगी मरीजों की खांसने की आवाज की रिकार्डिंग
- विशेषज्ञ लोगों के खांसने के तरीके की रिकार्डिंग की करेंगे जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। अब टीबी के मरीजों की जांच एक्सरे और मशीनों के अलावा उनके खांसने के तरीके से की भी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीज और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की खांसने की आवाज की मोबाइल एप ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ में रिकार्ड करेगा। विशेषज्ञ इस रिकार्डिंग के माध्यम से मरीजों की पहचान करेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तीन सप्ताह या इससे अधिक खांसी रहने पर स्वास्थ्य विभाग एक्सरे और बलगम की जांच कर टीबी के मरीजों की पहचान करता था। मगर, अब मरीजों की जांच उनके खांसने से ही जाएगी। स्वास्थ्य विभाग मरीज और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की वाइस रिकार्ड करेगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ यशवीर सिंह ने बताया 2025 तक देश से टीबी की बीमारी से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए विभाग की ओर से सर्वे कर मरीजों की पहचान की जा रही है। सेंट्रल टीबी डिविजन ने खांसी के तरीके से संदिग्ध लोगों की पहचान शुरू करने के निर्देश दिए है। जिले के टीबी के मरीज और उनके संपर्क में आने वाले लोगों के खांसने, बोलने की आवाज रिकार्ड की जा रही है। मोबाइल एप ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ के जरिए खांसने की आवाज से मरीजों की पहचान की जाएगी। मरीज अपने मोबाइल में भी एप डाउनलोड कर अपनी जांच कर सकते है। एप के माध्यम से सर्वे करने वाली टीम को भी काफी फायदा होगा।
विज्ञापन
- विशेषज्ञ लोगों के खांसने के तरीके की रिकार्डिंग की करेंगे जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। अब टीबी के मरीजों की जांच एक्सरे और मशीनों के अलावा उनके खांसने के तरीके से की भी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीज और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की खांसने की आवाज की मोबाइल एप ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ में रिकार्ड करेगा। विशेषज्ञ इस रिकार्डिंग के माध्यम से मरीजों की पहचान करेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तीन सप्ताह या इससे अधिक खांसी रहने पर स्वास्थ्य विभाग एक्सरे और बलगम की जांच कर टीबी के मरीजों की पहचान करता था। मगर, अब मरीजों की जांच उनके खांसने से ही जाएगी। स्वास्थ्य विभाग मरीज और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की वाइस रिकार्ड करेगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ यशवीर सिंह ने बताया 2025 तक देश से टीबी की बीमारी से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए विभाग की ओर से सर्वे कर मरीजों की पहचान की जा रही है। सेंट्रल टीबी डिविजन ने खांसी के तरीके से संदिग्ध लोगों की पहचान शुरू करने के निर्देश दिए है। जिले के टीबी के मरीज और उनके संपर्क में आने वाले लोगों के खांसने, बोलने की आवाज रिकार्ड की जा रही है। मोबाइल एप ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ के जरिए खांसने की आवाज से मरीजों की पहचान की जाएगी। मरीज अपने मोबाइल में भी एप डाउनलोड कर अपनी जांच कर सकते है। एप के माध्यम से सर्वे करने वाली टीम को भी काफी फायदा होगा।
विज्ञापन