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यूपी: पौष्टिक भत्ता न मिलने से फूल रहीं टीबी के मरीजों की सांसें, सभी ने बयां किया अपना-अपना दर्द

Tue, 19 Apr 2022 05:57 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बागपत
अमर उजाला ब्यूरो, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Tue, 19 Apr 2022 05:57 PM IST
सार

पौष्टिक भत्ता न मिलने से टीबी के मरीजों की सांसें फूल रही हैं। सभी अपने-अपने दर्द की कहानियां सुनाई है।

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TB patients' breathlessness due to non-receipt of nutritional allowance
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

टीबी की बीमारी से जूझ रहे करीब 700 मरीजों को जनवरी से अब तक पौष्टिक भत्ता नहीं मिल सका है। प्रत्येक मरीज के खाते में पौष्टिक भत्ते के रूप में प्रतिमाह 500 रुपये भेजे जाते हैं। बजट न होने के चलते मरीजों की सांसें फूल रही हैं।

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केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक क्षय रोग खत्म करने का लक्ष्य रखा हैै। इसके अंतर्गत बागपत जिले में अभियान चलाया जा रहा है। इसमें मरीजों को चिह्नित कर समुचित इलाज जिला अस्पताल के अतिरिक्त सभी सीएचसी व पीएचसी पर दिया जाता है। मरीजों को निशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार हासिल करने में किसी प्रकार की समस्या न हो। इसके लिए प्रतिमाह 500 रुपये पौष्टिक भत्ते के रूप में उनके बैंक खाते में भेजे जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 700 से अधिक टीबी के मरीज हैं। उन्हें बीते तीन माह से पौष्टिक भत्ता नहीं मिला है।
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एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली
टीबी पीड़ित इंतयाज का कहना है कि बीते तीन माह से टीबी का इलाज चल रहा है, लेकिन भत्ते के नाम पर फूटी-कौड़ी तक नहीं मिली। जिस कारण परेशानी हो रही है।

सेहतमंद होने की रफ्तार धीमी
ट्यौढ़ी गांव निवासी पीड़ित प्रमोद का कहना है कि बीते चार माह से पोषण युक्त आहार के लिए 500 रुपये भत्ता नहीं मिला है। ऐसे बहुत से मरीज हैं। इसके चलते उनके स्वस्थ होने की रफ्तार धीमी है।
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कुपोषण से बढ़ता है मर्ज
विशेषज्ञों के अनुसार टीबी पीड़ितों की संख्या बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कुपोषण है। केंद्र सरकार ने एक अप्रैल 2018 में निक्षय पोषण योजना की शुरूआत की थी। इसमेें टीबी मरीजों को पोषण युक्त आहार के लिए सरकार ने प्रतिमाह 500 रुपए पोषण भत्ता देने का फैसला किया था।

उदासीनता दिखा रहे निजी चिकित्सक
इस योजना में सबसे ज्यादा उदासीनता निजी चिकित्सक दिखा रहे हैं। वे टीबी अस्पताल प्रशासन को मरीजों का पता और खाता संख्या नहीं दे रहे हैं। इस कारण निजी चिकित्सक के पास इलाज कराने वाले 80 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को योजना का फायदा नहीं मिल रहा है।

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बजट के अभाव में टीबी मरीजों को भत्ता नहीं मिल रहा है। इस संबंध में पत्राचार किया गया है। जल्द ही मरीजों को भत्ता मिलने की उम्मीद है। - डॉ . अजेंद्र मलिक, उप जिला क्षय रोग अधिकारी

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