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जीवन को संयमित बनाकर संयमित बोलने की शिक्षा दी
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ागपत के दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पूजा करते श्रद्घालु
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय। दशलक्षण पर्व के छठे दिन जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने श्रीजी का जलाभिषेक का अर्घ्य चढ़ाए। जैन आचार्यों ने लोगों को उत्तम संयम धर्म की पूजा कराई। श्रद्धालुओं को जीवन में संयम अपनाकर संयमित बोलने की शिक्षा दी।
श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुधवार को भगवान श्री नेमीनाथ का अभिषेक कर भगवान श्री पारसनाथ की प्रतिमा को मंदिर प्रांगण में पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक और शांति धारा कराई गई। शांतिधारा सोनू जैन, विजय जैन, रजत जैन ने की। उसके उपरांत उत्तम संयम धर्म की पूजा हुई। प्राची जैन, संजीव जैन, सुनीता जैन, अरनव ने विधान किया। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने विराजमान श्री पारसनाथ भगवान के सम्मुख 121 अर्घ्य समर्पित किए। मयंक जैन ने कहा कि व्यक्ति को विपरित परिस्थितियों में भी संयम रखने और क्रोध के समय शांत मन से अपनी बात रखनी चाहिए। संध्याकाल में 48 दिवसीय भक्तांबर स्त्रोत का पाठ और महाआरती हुई। इसके उपरांत सांस्कृतिक कायक्रम में तंबोला प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। कार्यक्रम में पीयूष जैन, पंकज जैन, मुन्ना जैन, अतुल जैन,संजीव जैन, विनीत जैन, सार्थक जैन, ऋषभ जैन, यश जैन, तरुण जैन, विकास जैन, कमल, अनमोल, कामिनी जैन, सुषमा जैन, सुशीला जैन, पालकी जैन, बबीता जैन मौजूद रहीं।
अग्रवाल मंडी टटीरी के श्री दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान पाठ में बुधवार को श्रीजी को 64 अर्घ्य चढ़ाए गए। पंडित ऋषभ जैन ने कहा कि यदि नदी बिना तटों के बहे तो अपने लक्ष्य सागर तक नहीं पहुंच सकती। नदी के प्रवाह को रोकले के लिए तटों का बंधन जरूरी है। जीवन की नदी के लिए संयम के तटों का बंधन अनिवार्य है। पाठ में प्रवीण जैन, हर्ष जैन, संजय जैन, मुकेश जैन, जिनेंद्र जैन, गीता, माया, सुधा, अंजलि, प्रमिला, रेनू मौजूद रही। अमीनगर सराय में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को अर्घ्य चढ़ाए। मंदिर में धार्मिक प्रश्न प्रतियोगिता कर विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। शिवम शास्त्री ने जीवन में संयम के साथ रहकर वाणी को संयमित कर बोलने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि संयमित जीवन सदैव हितकारी ओर लाभप्रद होता है। कार्यक्रम में विनोद जैन, दिनेश जैन, सोनिया, अनीता, सारिका, सुखराम जैन, विपुल जैन, अनिल जैन मौजूद रहे।
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श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुधवार को भगवान श्री नेमीनाथ का अभिषेक कर भगवान श्री पारसनाथ की प्रतिमा को मंदिर प्रांगण में पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक और शांति धारा कराई गई। शांतिधारा सोनू जैन, विजय जैन, रजत जैन ने की। उसके उपरांत उत्तम संयम धर्म की पूजा हुई। प्राची जैन, संजीव जैन, सुनीता जैन, अरनव ने विधान किया। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने विराजमान श्री पारसनाथ भगवान के सम्मुख 121 अर्घ्य समर्पित किए। मयंक जैन ने कहा कि व्यक्ति को विपरित परिस्थितियों में भी संयम रखने और क्रोध के समय शांत मन से अपनी बात रखनी चाहिए। संध्याकाल में 48 दिवसीय भक्तांबर स्त्रोत का पाठ और महाआरती हुई। इसके उपरांत सांस्कृतिक कायक्रम में तंबोला प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। कार्यक्रम में पीयूष जैन, पंकज जैन, मुन्ना जैन, अतुल जैन,संजीव जैन, विनीत जैन, सार्थक जैन, ऋषभ जैन, यश जैन, तरुण जैन, विकास जैन, कमल, अनमोल, कामिनी जैन, सुषमा जैन, सुशीला जैन, पालकी जैन, बबीता जैन मौजूद रहीं।
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अग्रवाल मंडी टटीरी के श्री दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान पाठ में बुधवार को श्रीजी को 64 अर्घ्य चढ़ाए गए। पंडित ऋषभ जैन ने कहा कि यदि नदी बिना तटों के बहे तो अपने लक्ष्य सागर तक नहीं पहुंच सकती। नदी के प्रवाह को रोकले के लिए तटों का बंधन जरूरी है। जीवन की नदी के लिए संयम के तटों का बंधन अनिवार्य है। पाठ में प्रवीण जैन, हर्ष जैन, संजय जैन, मुकेश जैन, जिनेंद्र जैन, गीता, माया, सुधा, अंजलि, प्रमिला, रेनू मौजूद रही। अमीनगर सराय में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को अर्घ्य चढ़ाए। मंदिर में धार्मिक प्रश्न प्रतियोगिता कर विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। शिवम शास्त्री ने जीवन में संयम के साथ रहकर वाणी को संयमित कर बोलने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि संयमित जीवन सदैव हितकारी ओर लाभप्रद होता है। कार्यक्रम में विनोद जैन, दिनेश जैन, सोनिया, अनीता, सारिका, सुखराम जैन, विपुल जैन, अनिल जैन मौजूद रहे।
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