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विश्व जल दिवस पर कृषि विज्ञान केन्द्र पर आयोजित गोष्ठी मे पानी बचाने की ली गई शपथ
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खेकड़ा। नगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पर विश्व जल दिवस पर सोमवार को आयोजित संगोष्ठी में जल बचाने की शपथ दिलाई। कृषि वैज्ञानिकों ने लोगों को जल का महत्व बताया।
विश्व जल संरक्षण दिवस पर सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में संगोष्ठी हुई। इसका शुभारंभ केंद्र प्रभारी डॉ. गजेंद्रपाल सिंह ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में पानी का बहुत महत्व है। पानी के बिना प्राणी जीवित नहीं रह सकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रवींद्र कुमार ने घरों में लगे आरओ से निकलने वाले पानी से बर्तन धोने व गृहवाटिका की सिंचाई करने की अपील की।
सस्य वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी ने किसानों को पानी बचाने के लिए पूसा हाइड्रोजल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक किलो फसल बुआई के समय प्रति पांच बीघा में प्रयोग किया जाता है। यह सिंचाई के समय पानी सोखकर आवश्यकता अनुसार बूंदों के रूप में पानी छोड़ता रहता है। इससे 10 से 15 प्रतिशत तक सिंचाई की बचत होती है। डॉ. अंकिता नेगी ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान का मेघदूत एप द्वारा पता लगाने की जानकारी दी। इस दौरान विनोद शर्मा, देव नैन, कपिल धामा, रामवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, सलमा, गुलिस्ता, शबाना, सोनिया आदि कृषक और कृषक महिलाएं मौजूद रहे।
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विश्व जल संरक्षण दिवस पर सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में संगोष्ठी हुई। इसका शुभारंभ केंद्र प्रभारी डॉ. गजेंद्रपाल सिंह ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में पानी का बहुत महत्व है। पानी के बिना प्राणी जीवित नहीं रह सकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रवींद्र कुमार ने घरों में लगे आरओ से निकलने वाले पानी से बर्तन धोने व गृहवाटिका की सिंचाई करने की अपील की।
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सस्य वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी ने किसानों को पानी बचाने के लिए पूसा हाइड्रोजल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक किलो फसल बुआई के समय प्रति पांच बीघा में प्रयोग किया जाता है। यह सिंचाई के समय पानी सोखकर आवश्यकता अनुसार बूंदों के रूप में पानी छोड़ता रहता है। इससे 10 से 15 प्रतिशत तक सिंचाई की बचत होती है। डॉ. अंकिता नेगी ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान का मेघदूत एप द्वारा पता लगाने की जानकारी दी। इस दौरान विनोद शर्मा, देव नैन, कपिल धामा, रामवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, सलमा, गुलिस्ता, शबाना, सोनिया आदि कृषक और कृषक महिलाएं मौजूद रहे।
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