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इच्छाओं का दमन करना ही उत्तम आकिंचन धर्म

Mon, 14 Feb 2022 10:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Feb 2022 10:57 PM IST
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Suppression of desires is the best religion
बरनावा के श्री चंद्रप्रभु मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु - फोटो : BARAUT
संवाद न्यूज एजेंसी
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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व माघ माह के उपलक्ष्य में चल रहे दशलक्षण पर्व के नवम सोपान पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने उत्तम आकिंचन धर्म का अंगीकार किया। दस श्रीफल समर्पित कर भगवान चंद्रप्रभु की पूजा अर्चना की।

पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि मेरा मेरे से अतिरिक्त कुछ भी नहीं, इसी भाव का नाम आकिंचन है। आकिंचन धर्म हमें प्रण मात्र भी परिग्रह ना रखने की शिक्षा देता है। जिसका शरीर के साथ भी एकत्व नहीं है, उसकी तो पुत्र, स्त्री या मित्रों के साथ कैसे एकता संभव है। जो चेतन अचेतन दोनों प्रकार के परिग्रहों को मन वचन काया कृत कार्य अनुमोदना करके सर्वथा छोड़ देते है, जो व्यवहार तक से विरक्त रहता है, वह उत्तम आकिंचन धर्म का धारी है। आकिंचन धर्म का आशय यहीं है कि ब्रह्य से रहित आत्म साधना से सहित होना चाहिए। इंद्रिय निग्रह करना, इच्छाओं का दमन करना, शारीरिक भागों से उदासीन एकांत में आत्मा का साक्षात्कार करना, जीवन के कोलाहल से दूर, अशांति से आत्मचिंतन युक्त होना ही आकिंचन धर्म का स्वरूप है। पूजा अर्चना में सरिता जैन, सीता जैन, राजेंद्र जैन, राकेश जैन, लोकेश जैन, आदि उपस्थित रहे।
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