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गन्नें की फसल को लगा कीट, नुकसान की आशंका
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फसलों में बीमारी को समय से पहचानना होगा
बागपत। बरसात के मौसम में गन्ने की फसल को कीट लग गया है। इससे फसल में नुकसान होने संभावना बढ़ गई है। समय पर कीट की पहचान और उपचार न किया गया तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल में चोटी वेधक कीट लगने से पत्ती के मध्य सिरे पर लाल धारी तथा किनारों की पत्तियों पर गोल छेद बन जाते हैं। इसके अलावा झाड़ीनुमा सिरे बनना भी इस रोग की पहचान है। कीट गन्ने के तने में प्रवेश कर पोरी के अंदर पहुंचता है। गन्ना फाड़ने पर लाल दिखाई देता है। पोरी में जगह-जगह छेद हो जाते हैं। रोग से बचाव के लिए मोना क्रोटोफॉस 36 प्रति एसएल दो लीटर प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए। गन्ने में लगने वाला थ्रिप्स कीट रस चूसने वाला कीट है। रोग लगने पर गन्ने की पत्तियां नोक की तरफ गोल हो जाती है। फसल में थ्रिप्स रोग लगने पर फिप्रोनिल 40 प्रति ईसी 200 ग्राम व मैन्कोजेब 63 प्रति कार्बंडाजिम 12 प्रति डब्लूपी 400 ग्राम का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ में छिड़काव करने से फसल को रोग से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गन्ने में पोक्का बोइंग रोग लगने का खतरा रहता है। यह फफूंदी जनित रोग है। रोग में पत्तियों के आधार पर सफेद रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। मैन्कोजेब 63 प्रति कार्बन्डाजिम 12 प्रति डब्लूपी 250 ग्राम तथा इमिडाक्लोरप्रिड 100 मिली का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ एवं 10 से 12 दिन के अंतराल पर 300 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड व 100 ग्राम थायोमेथाक्साम को 200 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने से रोग से फसल को बचाया जा सकता है।
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बागपत। बरसात के मौसम में गन्ने की फसल को कीट लग गया है। इससे फसल में नुकसान होने संभावना बढ़ गई है। समय पर कीट की पहचान और उपचार न किया गया तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल में चोटी वेधक कीट लगने से पत्ती के मध्य सिरे पर लाल धारी तथा किनारों की पत्तियों पर गोल छेद बन जाते हैं। इसके अलावा झाड़ीनुमा सिरे बनना भी इस रोग की पहचान है। कीट गन्ने के तने में प्रवेश कर पोरी के अंदर पहुंचता है। गन्ना फाड़ने पर लाल दिखाई देता है। पोरी में जगह-जगह छेद हो जाते हैं। रोग से बचाव के लिए मोना क्रोटोफॉस 36 प्रति एसएल दो लीटर प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए। गन्ने में लगने वाला थ्रिप्स कीट रस चूसने वाला कीट है। रोग लगने पर गन्ने की पत्तियां नोक की तरफ गोल हो जाती है। फसल में थ्रिप्स रोग लगने पर फिप्रोनिल 40 प्रति ईसी 200 ग्राम व मैन्कोजेब 63 प्रति कार्बंडाजिम 12 प्रति डब्लूपी 400 ग्राम का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ में छिड़काव करने से फसल को रोग से बचाया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि गन्ने में पोक्का बोइंग रोग लगने का खतरा रहता है। यह फफूंदी जनित रोग है। रोग में पत्तियों के आधार पर सफेद रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। मैन्कोजेब 63 प्रति कार्बन्डाजिम 12 प्रति डब्लूपी 250 ग्राम तथा इमिडाक्लोरप्रिड 100 मिली का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ एवं 10 से 12 दिन के अंतराल पर 300 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड व 100 ग्राम थायोमेथाक्साम को 200 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने से रोग से फसल को बचाया जा सकता है।
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