{"_id":"57d46e904f1c1b3d3b31bfe1","slug":"students-respect-parents-teachers","type":"story","status":"publish","title_hn":"माता-पिता, शिक्षकों का सम्मान करें ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माता-पिता, शिक्षकों का सम्मान करें
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
Updated Sun, 11 Sep 2016 02:21 AM IST
विज्ञापन
दयानन्द विद्या मंदिर में मेधावियों को सम्मानित करते पदाधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर एसोसिएशन, आर्य समाज और एस्रो के संयुक्त तत्वावधान में सर्वोदय इंटर कॉलेज, महावतपुर बावली में नवयुवकों के चरित्र निर्माण पर कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता सुरेंद्र कौशिक प्रधानाचार्य ने की। संचालन करते प्रीतम सिंह वर्मा ने कहा माता-पिता और गुरू के ऋण से उनका सदैव आदर करने और उनके आदेशों का पालन करने से मुक्ति मिल सकती है। उन्होंने कहा जब तीन उत्तम शिक्षक माता-पिता और आचार्य होते हैं। तभी मनुष्य ज्ञानवान होता है। हमें अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान और आदर करना चाहिए, तभी हम आगे बढ़ सकेंगे।
सत्यपाल पथौलिया ने कहा भविष्य अपने परिश्रम से बनता है। पढ़ते समय कभी कक्षा से अनुपस्थित न रहें। उच्च स्थान प्राप्त करने को प्रयत्नशील रहें। केवल सिपाही बनने वाली सोच बदलनी होगी। एस्रो के संजय राणा ने कहा भविष्य में छात्र-छात्राओं को रोजी-रोटी हेतु संघर्ष करना पड़ेगा।
विज्ञापन
दूसरे पंच तत्व भूमि गगन, वायु, जल-अग्नि में बंद रहे प्रदूषण के संबंध में लड़ाई लड़नी होगी। हम सभी को पर्यावरण के प्रति सचेत करना होगा। इस मौके पर डॉ. ओमवीर आर्य ने कहा पिछले अच्छे कर्म के अनुसार मानव जन्म मिला है।
इसलिए उस परमात्मा की प्रार्थना उपासना अवश्य किया करें। स्वास्थ्य रहने के लिए योग या प्राणायाम अपनाएं। चरण सिंह मलिक ने दो गीतों पर मां की महिमा पर प्रकाश डाला। इस कार्यशाला में उज्ज्वल सोलंकी, क्रिश तोमर, प्रशांत तोमर, अवनी तोमर, मानषी कश्यप, पवन सिंह मान, बाबूराम, बालेश तोमर, उमेश कुमार, शरद तोमर आदि रहे।
विज्ञापन
कार्यशाला की अध्यक्षता सुरेंद्र कौशिक प्रधानाचार्य ने की। संचालन करते प्रीतम सिंह वर्मा ने कहा माता-पिता और गुरू के ऋण से उनका सदैव आदर करने और उनके आदेशों का पालन करने से मुक्ति मिल सकती है। उन्होंने कहा जब तीन उत्तम शिक्षक माता-पिता और आचार्य होते हैं। तभी मनुष्य ज्ञानवान होता है। हमें अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान और आदर करना चाहिए, तभी हम आगे बढ़ सकेंगे।
विज्ञापन
सत्यपाल पथौलिया ने कहा भविष्य अपने परिश्रम से बनता है। पढ़ते समय कभी कक्षा से अनुपस्थित न रहें। उच्च स्थान प्राप्त करने को प्रयत्नशील रहें। केवल सिपाही बनने वाली सोच बदलनी होगी। एस्रो के संजय राणा ने कहा भविष्य में छात्र-छात्राओं को रोजी-रोटी हेतु संघर्ष करना पड़ेगा।
विज्ञापन
दूसरे पंच तत्व भूमि गगन, वायु, जल-अग्नि में बंद रहे प्रदूषण के संबंध में लड़ाई लड़नी होगी। हम सभी को पर्यावरण के प्रति सचेत करना होगा। इस मौके पर डॉ. ओमवीर आर्य ने कहा पिछले अच्छे कर्म के अनुसार मानव जन्म मिला है।
इसलिए उस परमात्मा की प्रार्थना उपासना अवश्य किया करें। स्वास्थ्य रहने के लिए योग या प्राणायाम अपनाएं। चरण सिंह मलिक ने दो गीतों पर मां की महिमा पर प्रकाश डाला। इस कार्यशाला में उज्ज्वल सोलंकी, क्रिश तोमर, प्रशांत तोमर, अवनी तोमर, मानषी कश्यप, पवन सिंह मान, बाबूराम, बालेश तोमर, उमेश कुमार, शरद तोमर आदि रहे।