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गंदगी का दंश झेल रहे बड़कावासी
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बड़ौत। केंद्र सरकार भले ही स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का सपना देख रही हो, लेकिन बड़का गांव मेें इस सपने को पलीता लगता नजर आ रहा है। गांव की छह हजार आबादी में मात्र एक महिला सफाई कर्मचारी तैनात है और वह भी पिछले कई रोज से नहीं जा रही है। जिस कारण गांव की गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं और ग्रामीणों को संक्रमण फैलने का खतरा मंडरा रहा है।
बड़ौत नगर से पांच किलोमीटर दूर बड़का गांव की आबादी छह हजार है, लेकिन गांव में यदि साफ सफाई की बात करें तो नतीजा शून्य निकलता है, क्योंकि छह हजार की आबादी में गांव में मात्र एक महिला सफाई कर्मचारी तैनात है। ग्रामीणों के अनुसार वह भी पिछले एक-दो सप्ताह से नहीं आ रही है, यदि आती भी है तो प्रधान के मकान के पास के मोहल्लों में सफाई कर चली जाती है। सही ढंग से सफाई न होने के कारण गांव की गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं और कूडे़ से उठने वाली दुर्गंध से लोग परेशान हो चुके हैं। इससे ग्रामीणों को गांव में संक्रमण फैलने का खतरा बना है।
ये कहते है ग्रामीण
बड़ौत। ग्रामीण राशिद मलिक का कहना है कि गांव में स्थित तीनों तालाब इस समय गंदगी से अटे पड़े है। जिस कारण अब घरों से निकलने वाला गंदा पानी भी तालाब में जाने के बजाए गलियों में ही रूक जाता है, इससे गलियों में जल भराव की स्थिती बनी रहती है।
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बड़ौत। दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और बड़का निवासी अक्षय चौहान का कहना है कि संपर्क मार्ग से लेकर गांव की सड़कों और गलियों का बहुत बुरा हाल है। बरसात के पानी निकास की कोई व्यवस्था नहीं है। जगह-जगह कीचड़ के ढेर लगे हैं।
बड़ौत। ग्रामीण अजय चौहान का कहना है कि सफाई कर्मचारी महीने में एक बार आती है। गांव में सफाई हो रही है या नहीं कभी अधिकारियों ने गांव में जाकर नहीं देखी। इससे लोगों में अधिकारियों के प्रति गुस्सा पनप रहा है। गुस्सा आंदोलन का रूप ले सकता है।
बड़ौत। सुरेश चंद का कहना है कि इससे गांव में बिना बरसात के ही जलभराव जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। कहीं सड़कों पर गंदगी फैली हुई है तो कहीं नालियों की गंदगी ऊपर कर सड़कों पर आ गई है। नालियां कूड़ा कचरा से पटी हुई हैं। नालियों की सफाई होना तो दूर महीनों से सड़कों पर झाडू नहीं लगी है। इससे बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ेगी।
ये बोले अधिकारी---
बड़ौत। बीडीओ राहुल वर्मा का कहना था कि गांव में सफाई न होने का मामला गंभीर है। यदि ग्राम विकास सचिव या ग्राम प्रधान द्वारा इसमें लापरवाही बरती जा रही है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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बड़ौत नगर से पांच किलोमीटर दूर बड़का गांव की आबादी छह हजार है, लेकिन गांव में यदि साफ सफाई की बात करें तो नतीजा शून्य निकलता है, क्योंकि छह हजार की आबादी में गांव में मात्र एक महिला सफाई कर्मचारी तैनात है। ग्रामीणों के अनुसार वह भी पिछले एक-दो सप्ताह से नहीं आ रही है, यदि आती भी है तो प्रधान के मकान के पास के मोहल्लों में सफाई कर चली जाती है। सही ढंग से सफाई न होने के कारण गांव की गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं और कूडे़ से उठने वाली दुर्गंध से लोग परेशान हो चुके हैं। इससे ग्रामीणों को गांव में संक्रमण फैलने का खतरा बना है।
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ये कहते है ग्रामीण
बड़ौत। ग्रामीण राशिद मलिक का कहना है कि गांव में स्थित तीनों तालाब इस समय गंदगी से अटे पड़े है। जिस कारण अब घरों से निकलने वाला गंदा पानी भी तालाब में जाने के बजाए गलियों में ही रूक जाता है, इससे गलियों में जल भराव की स्थिती बनी रहती है।
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बड़ौत। दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और बड़का निवासी अक्षय चौहान का कहना है कि संपर्क मार्ग से लेकर गांव की सड़कों और गलियों का बहुत बुरा हाल है। बरसात के पानी निकास की कोई व्यवस्था नहीं है। जगह-जगह कीचड़ के ढेर लगे हैं।
बड़ौत। ग्रामीण अजय चौहान का कहना है कि सफाई कर्मचारी महीने में एक बार आती है। गांव में सफाई हो रही है या नहीं कभी अधिकारियों ने गांव में जाकर नहीं देखी। इससे लोगों में अधिकारियों के प्रति गुस्सा पनप रहा है। गुस्सा आंदोलन का रूप ले सकता है।
बड़ौत। सुरेश चंद का कहना है कि इससे गांव में बिना बरसात के ही जलभराव जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। कहीं सड़कों पर गंदगी फैली हुई है तो कहीं नालियों की गंदगी ऊपर कर सड़कों पर आ गई है। नालियां कूड़ा कचरा से पटी हुई हैं। नालियों की सफाई होना तो दूर महीनों से सड़कों पर झाडू नहीं लगी है। इससे बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ेगी।
ये बोले अधिकारी---
बड़ौत। बीडीओ राहुल वर्मा का कहना था कि गांव में सफाई न होने का मामला गंभीर है। यदि ग्राम विकास सचिव या ग्राम प्रधान द्वारा इसमें लापरवाही बरती जा रही है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।